152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(i) एक तथ्य के प्रमाण का भार एक व्यक्ति पर है, जो उस तथ्य के प्रमाण के लिए साक्ष्य विधि द्वारा प्रावधानित विशेष सुविधाओं द्वारा स्वयं को लाभान्वित करना चाहता है। धारा 104 इस सिद्धान्त का एक दृष्टांत है।
एक विशेष तथ्य को प्रमाणित करने का भार।
नियम वही है जैसा कि एक विवाद्यक विषय के प्रमाणित करने के भारत के
विषय में है। अर्थात् एक विशेष तथ्य को प्रमाणित करने का भार उस पक्ष
पर है जो तथ्य की विद्यमानता की पुष्टि करता है और न कि उस पक्ष पर
जो उसे अस्वीकार करता है। यह नियम धारा 103 में समाया हुआ है और
दोनों विषयों में नियम के कारण वही हैं।
- उस पर भी कुछ तथ्य हैं जिनको प्रमाणित करने का भार विधि द्वारा एक
विशेष व्यक्ति पर रखा जाता है, इस प्रश्न के होते हुए भी अगर वह उसके
अस्तित्व को निश्चयपूर्वक कहता है या उसके अस्तित्व को नकारता है।
धाराएं 104 से 111 तक उन मामलों का उल्लेख करती हैं, जिनमें साक्ष्य
विधि विशेष व्यक्तियों पर भार डालती है।
- इन धाराओं के आधार के सिद्धान्त और जो प्रमाण-भार से संबंधित सामान्य
सिद्धांत से इस विचलन को न्यायोचित करते हैं, चार प्रतीत होते हैं।
(i) किसी तथ्य को प्रमाणित करने का भार एक पक्ष पर होना चाहिए जो
उस तथ्य के प्रमाण के लिए साक्ष्य विधि द्वारा दी गई विशेष सुविधाओं
का लाभ लेना चाहता है।
(ii) जब पक्षगण अपनी संबंधित अवस्थिति में असमान है एक विशेष तथ्य
को प्रमाणित करने का भार उस पर होना चाहिए, जो तुलनात्मकतः एक
श्रेष्ठतर या प्रबलतर दशा में है।
(iii) जहां परिस्थितियां निरंतर विद्यमान रहती हैं, उनकी अनिरंतरता को प्रमाणित
करने का भार उस पक्ष पर है जो अनिरंतरता को आरोपित करता है।
(iv) जहां एक तथ्य मात्र एक अन्य तथ्य की विधिक घटना है, प्रमाणित करने
का भार, जबकि घटना उस तथ्य से नहीं जोड़नी चाहिए उस पक्ष पर है
जो आरोपित करता है कि वह नहीं होनी चाहिए।
प्रथम सिद्धांत की निर्देशी धाराएं
- धारा 104 प्रथम सिद्धांत का एक निदर्शन है। यह एक तथ्य के प्रमाण-भार
के साथ व्यवहार करती है, जिसका प्रमाण एक अन्य तथ्य के प्रमाण के
लिए एक आवश्यक पूर्वापेक्षा है।