भाग -3 प्रमाण का भार - Page 171

154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

हरधन की दो पुत्रियां थीं - लगभग एक वर्ष की जुड़वां - उनमें से एक को एक वेश्या करूना को 9 रु. में बेच दिया और 10 दिनों के अंतर्गत करूना को बेच दिया जिसको उसने उसके बचपन से लालन-पालन किया और जो उसके साथ रह रही थी और एक वेश्या का जीवन जी रही थी।

प्रश्न - धारा 372/373 के अधीन एक अभियोजन में एक नाबालिग को वेश्यावृत्ति के लिए क्रय और विक्रय के लिए प्रश्न था किसको प्रमाणित करना चाहिए कि अभीच्छा थी कि लड़की वेश्यावृत्ति के लिए प्रयोजित की जानी थी। अभियुक्त के द्वारा क्योंकि मामला उसकी जानकारी में था।

23 इला. 124

अनेक व्यक्ति, आगरा नगर के ठीक बाहर एक सड़क पर रात के 11 बजे अपने वस्त्रों के नीचे अस्त्र (बंदूकें एवं तलवारें) छुपाए हुए ले जाते हुए पाए गए। उनमें से किसी के पास अस्त्र ले जाने का लाइसेंस नहीं था और उनमें से कोई भी उस स्थान पर अपनी उपस्थिति का सही-सही स्पष्टीकरण नहीं दे सका।

धारा 402 के अधीन एक आरोप में निर्धारित किया गया कि अभीच्छा (मंशा) का भार अभियुक्त पर था।

धारा 111

  1. यह धारा एक कार्य संपादन में सद्विश्वास के संबंध में प्रमाण के भार के साथ संबंध रखती है।

2. सद्विश्वास की परिभाषा।

(1) साक्ष्य अधिनियम में सद्विश्वास को परिभाषित नहीं किया गया है।

(2) यह भारतीय दंड संहिता की धारा 52 में परिभाषित किया गया है।

कुछ भी सद्विश्वास में किया गया या विश्वास किया गया नहीं कहा गया

है जो सम्यक सावधानी और ध्यान के बिना किया गया या विश्वास किया

गया है।

(3) यह 1897 के दशम खंड अधिनियम की धारा 3(20) में भी परिभाषित किया

गया है। फ्एक बात सद्विश्वास में की गई समझी जाएगी जहां वह वस्तुतः

सत्यता से की जाती है, चाहे लापरवाही से की जाती है या नहीं की जाती

है।य्

(4) दोनों परिभाषाओं में अंतर है कि दण्ड संहिता द्वारा दी गई परिभाषा के रूप

में सद्विश्वास के लिए सत्यता का प्रश्न तत्त्वहीन है। किन्तु सामान्य खंड

अधिनियम में दी गई परिभाषा का यह नितांत अभ्यंतर है।