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(5) शब्द सद्विश्वास साक्ष्य अधिनियम में जैसा प्रयुक्त किया जाता है उसी भाव
में प्रयुक्त किया जाता है जिसमें यह सामान्य खंड अधिनियम में किया जाता
है।
- सद्विश्वास को प्रमाणित करने के भार के संबंध में सामान्य नियम।
(i) धारित करने के लिए विधि का यह सामान्य सिद्धान्त है कि सभी व्यक्ति अपने व्यवहार में न्यायसंगत कार्य करें। कुछ भी निंदनीय या घृणास्पद किसी भी व्यक्ति पर आरोपित नहीं किया जाए। कानून द्वेष और अनाचार को आरोपित नहीं करेगा। ऐसा होने पर जो किसी व्यक्ति के आचरण को बेईमानी या अन्याय होने के लिए अभियोजित करता है। बेईमानी और अन्याय को प्रमाणित करने का भार रखता है। दूसरे शब्दों में सद्विश्वास के संबंध में प्रमाण-भार उस व्यक्ति पर है जो सद्विश्वास के अभाव को आरोपित करता है। उद्देश्य अवश्य प्रमाणित होना चाहिए।
(ii) धारा 111 इस सामान्य नियम का एक अपवाद अधिनियमित करती है और उन परिस्थितियों को निर्धारित करती है जिनमें एक व्यक्ति को सद्विश्वास के अभाव को अवश्य ही प्रमाणित करना चाहिए।
यदि दो पक्षों के मध्य कार्य सम्पादन में उनमें से किसी एक के द्वारा सद्विश्वास को प्रश्न चिह्न लगाया है और दोनों ऐसे संबंधित हैं कि एक दूसरे के लिए सक्रिय भरोसे में होता है तो सद्विश्वासक को प्रमाणित करने का भार अवश्यमेव उस व्यक्ति पर है जो सक्रिय भरोसे की स्थिति में होता है।
यह अपवाद केवल उस जगह लागू होता है जहां दो पक्ष कार्य संपादन के लिए ऐसे संबंधित हैं कि एक दूसरे के लिए एक सक्रिय भरोसे की स्थिति में होता है।
4. फ्सक्रिय भरोसे की स्थितिय् का अर्थ
(i) स्थिति का अभिप्राय है विधिक संबंध।
(ii) सक्रिय भरोसे का अर्थ है राय लेने और सलाह पर कार्य करने का कर्म।
अतः सक्रिय भरोसे की स्थिति का अभिप्राय है, पक्षों के बीच ऐसे विधिक संबंध को उठाना जो कि एक पक्ष में राय लेने तथा दूसरे में उसके हित के संरक्षण के लिए स्वभाव को उद्भूत करता है और दूसरे पर यह देखने का कर्त्तव्य आरोपित करता है कि उसकी राय ऐसी है जो कि उसके हित को संरक्षित करती है।
धारा, पक्षों के बीच विधिक संबंध को ऐसे विचारित करती है कि दूसरे के हितों की रक्षा करना भरोसे में लिए गए व्यक्ति का कर्त्तव्य हो जाता है।
कॉलसन बनाम एॅलीसन नियम लागू होता है क्योंकि पक्ष
2 डी.एफ. एवं जे. 581 और विपक्ष पति और पत्नी है।