भाग -3 प्रमाण का भार - Page 173

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

विपक्ष पति और पत्नी है।

हॅरग्रीव बनाम एवरार्ड नियम लागू नहीं हुआ था क्योंकि

आई.आर.सी.एच.आर. 278 पक्ष और विपक्ष पति-पत्नी नहीं थे बल्कि

प्रेमिका और प्रेमी थे।

यदि एक मामला न्यासी एवं लाभार्थी सालिसिटर एवं मुवक्किल, पिता एवं पुत्र या पति एवं पत्नी के मध्य सद्विश्वास का उठाया गया है तो इस नियम के अंतर्गत आएगा।

  1. यद्यपि धारा के द्वारा यह नियम उन मामलों तक परिसीमित कर दिया गया है जहां एक व्यक्ति दूसरे के प्रति सक्रिय भरोसे की स्थिति में होता है, न्यायालय द्वारा यह नियम सभी मामलों के लिए व्यापक कर दिया गया है जहां एक व्यक्ति दूसरे पर प्रधानता रखता है और अनुपयुक्त प्रभाव डालने की स्थिति में है।

धारा 107-108

  1. वे अवश्य एक साथ पढ़ने चाहिए क्योंकि धारा 108 धारा 107 में अंतर्विष्ट

नियम की केवल परंतुक है।

  1. यह धारा इस प्रश्न का निपटान नहीं करती कि एक व्यक्ति कब तक जीवित

था।

  1. यह धारा इस प्रश्न का निपटान नहीं करती कि उस समय वह किस तरह

मृत हुआ।

  1. यह धारा इस प्रश्न का निपटान नहीं करती कि क्या वह किसी पूर्ववर्ती दिनांक

को जीवित या मृत था।

  1. धारा इस प्रश्न के साथ बर्ताव करती है कि क्या एक व्यक्ति उस समय

जीवित या मृत था जब प्रश्न उत्पन्न किया जाता है अर्थात् जिस दिन मामला

दायर किया गया।

तृतीय सिद्धांत की विदेशी धाराएं

धारा 107, 108 और 109

धारा 107 प्रमाण-भार के बारे में बताती है जहां प्रश्न है कि एक पुरुष जीवित या मृत है।

इस धारा के अनुसार जहां यह प्रमाणित कर दिया जाता है कि प्रश्नगत व्यक्ति विगत 30 वर्षों में जीवित था तब प्रमाण का भार उस पक्ष पर है जो निश्चित रूप से कहता है कि वह मृतक है। जहां यह प्रमाणित नहीं किया जाता कि व्यक्ति पिछले 30