166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अभिगमन न होने का अभिप्राय
1934, 38 बम्बई एल.आर. 394
करपया बनाम मायन्दी
अभिगमन वास्तविक या साथ-साथ रहने में प्रयुक्त नहीं होता। वह समागम के अवसर से अधिक कुछ भी नहीं।
करपया, एक मद्रासी हिन्दू, ने बर्मा में एक विचारणीय संपत्ति अर्जित की। वह 1923 में पागल हो गया।
करपया ने पहले करायापी के साथ विवाह किया और फिर नचियाया के साथ विवाह किया। करपया नचियामा के साथ तामाग्यो में रहता था जबकि करायाप्पी हॉलमीन में अपनी मां और भाई के साथ रहती थी।
1911 में उन दोनों के बीच एक समझौता किया गया (जो अधूरा रहा - संपादक)।
- समागम की अक्षमता का साक्ष्य देने पर निष्कर्ष को समाप्त नहीं किया जा सकता।
29 आई.ए. 17/1901 नरेंद्र बनाम रामगोविन्द
उपेंद्र ने तिलोत्तमा के साथ विवाह किया। उपेंद्र 15 जुलाई को पीठ के एक फोड़े के कारण से मर गया, जिससे वह कुछ समय से पीडि़त था।
उपेंद्र की मृत्यु के बाद, तिलोत्तमा ने 18 अप्रैल 1887 को एक पुत्र नरेंद्र को जन्म दिया, अर्थात् उपेन्द्र की मृत्यु से 9 माह 10 दिन या 280 दिन बाद।
विचार किए जाने के लिए तीन प्रश्न थेः
(1) क्या नरेंद्र तिलोत्तमा-उपेंद्र का पुत्र था?
(2) क्या वह उपेंद्र की मृत्यु से 280 दिन के अंतर्गत जन्मा था?
(3) क्या वह प्रमाणित है कि उसके (उपेंद्र के) एवं उसके (तिलोत्तमा के) हर
एक के साथ किसी समय पर जब अधियाचक का जन्म हो सका, कोई
अभिगमन नहीं हुआ था?
अन्तिम विवाद्यक पर निम्नोक्त साक्ष्य थाः-
तिलोत्तमा का विवाह हुआ जब वह एक निरीह बच्ची थी और अपने माता-पिता के साथ रहती थी। किन्तु उसकी मृत्यु के कुछ समय पूर्व जुलाई 1886 में अपने पति के साथ रहने गई कितने पहले यह स्पष्ट नहीं था। कुछ साक्षियों ने कहा पांच या छः दिन पूर्व दूसरों ने कहा दस या बारह दिन पूर्व।
मामले में दो विशेष परिस्थितियां थींः