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धारा 41
यह धारा कुछ प्रश्नों क प्रमाण या अप्रमाण के लिए विधिक न्यायालयों के निर्णयों के प्रयोग करने के संबंध में कहती है।
प्रश्न हैः-
क्या (1) किसी व्यक्ति का एक निश्चित प्रतिष्ठा को धारित करने का अधिकार करता है?
(2) यदि ऐसा है, तो कब?
प्रश्न है क्याः-
कोई विशेष व्यक्ति किसी एक संपत्ति के प्रति हकदार था।
धारा घोषित करती है कि कतिपय निर्णय इन तथ्यों के निश्चायक प्रमाण होंगे। ये निर्णय क्या हैः
(1) यह एक सक्षम न्यायालय का निर्णय अवश्य होना चाहिए। (2) यह निर्णय इन अभ्यासों में अवश्य होना चाहिए।
(1) संप्रमाण
(2) वैवाहिक
(3) नौ-अधिकरण
(4) दिवालियापन में।
(1) जो किसी व्यक्ति पर या उस पर पुष्ट करने या विधिक चरित्र के लिए जाने
को घोषित करता है।
(2) जो एक व्यक्ति को किसी विशिष्ट वस्तु का किसी उल्लिखित व्यक्ति के
विरुद्ध नहीं, वरन् उसको पूर्णतः अधिकृत घोषित करता हो। (3) यदि यह एक अंतिम निर्णय, आदेश या डिक्री हो।
संप्रमाण-अधिक्षेत्र
न्यायालय वसीयती एवं निर्वसीयती अधिक्षेत्र का प्रयोग करता हैः (1) भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के अधीन
(2) हिन्दू वसीयतनामा अधिनियम के अधीन
(3) संप्रमाण एवं प्रशासन अधिनियम के अधीन
वैवाहिक अधिक्षेत्र
भारतीय तलाक अधिनियम एवं विवाह एवं तलाक से संबंधित अन्य अधिनियमों के