170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अधीन निष्पादित।
नौ-अधिकरण अधिक्षेत्र
उच्च न्यायालय अधिकार पत्र एवं औपनिवेशिक न्यायालय नौ-अधिकरण अधिनियम, 1890।
दिवाला - अधिक्षेत्र
लाभ प्रदान करती है न्यास के सदृश्य होती है।
- न्यास एवं दान के बीच इतनी अधिक समरूपता है कि दोनों का परिणाम
स्वामित्व होता है। न्यासी एवं आदाता दोनों संपत्ति के स्वामी हो जाते हैं।
- किन्तु दोनों के बीच भेद है। दान में आदाता संपत्ति से जैसे चाहे निपटे। न्यास
में न्यासी संपत्ति का एक विशेष ढंग से विशेष प्रयोजन के लिए उपयोग
करने के लिए बाध्य होता है।
न्यास संविदा से प्रभेदित
यह कि न्यास एवं संविदा के बीच प्रभेद है। न्यास एवं संविदा से संयोजित भेद करने वाले विधिक परिणामों की विद्यमानता से स्पष्ट हैः-
(i) न्यास यदि निष्पादित है तो लाभग्राही द्वारा जो उसका पक्ष नहीं है, प्रवर्तित किया जा सकता है, जबकि संविदा के वास्तविक पक्ष नियमतः उस पर वाद कर सकते हैं।
(ii) निष्पादित स्वैच्छिक न्यास पूर्णतः प्रवर्तनीय है, जबकि प्रतिफल हीन संविदा नहीं है।
- तथापि इस प्रश्न का निर्धारण, कि क्या दिया गया तथ्यों का सेट न्यास या संविदा को जन्म देता है, आसान नहीं है। कसौटी क्या है?
कीटन - पृष्ठ 5-6 (1919) ए.सी. 801
38 बम्बई एस.आर. 610
(1926) ए.सी. 108
यह आशय का प्रश्न है।
न्यास शक्ति से प्रभेदित
शक्ति शब्द के विस्तृततम अर्थ में किसी व्यक्ति को दिए गए प्रत्येक प्राधिकार शामिल है वह व्यक्ति शक्ति का आदाता कहा जाता है। उसको प्राधिकार देने वाले व्यक्ति (शक्ति का दाता कहा जाता है) के पक्ष में या उससे संबंधित अधिकारों के कार्यान्वयन में कार्य करने के लिए।
शक्तियां कई प्रकार की होती हैं -