172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
और प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त करने के दायित्व है कि लाभ विवेक रख सकता है कि क्या वह कुछ व्यक्त कार्यों को करेगा या नहीं करेगा, या कि धनराशि किसी व्यक्ति या प्रयोजन या कि उसके प्रयोग के लिए समय एवं विधा के लिए प्रयुक्त किए जाने के लिए विवेक का प्रयोग करेगा या नहीं करेगा। ऐसे वादों में न्यायालय न्यासी को शक्ति को अनुचित रूप से प्रयोग करने से रोकेगा, वह उसको उसके विवेक के उचित प्रयोग को नियंत्रित करने के प्रयास या ऐसे कार्य करने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
- शक्ति न्यास के सदृश्य होती है और उससे भिन्न भी होती है।
(i) यह न्यास के सदृश लगती है जहां तक शक्ति निपटान करने का एक प्राधिकार
है।
(ii) यह न्यास से भेद करती है जहां तक विवेकाधिकार है, जहां तक न्यास
आज्ञात्मक होता है, न्यासी यदि स्वीकार करता है तो उस अवश्य नहीं करना
चाहिए जो निदेश दे।
*VII नए न्यासीगण
(1) पद एवं संविदा की या मृत्योपरांत न्यासी की उत्तर जीविका।
(2) उत्तरजीवी के निधनोपरांत पद एवं संपदा का न्यागमन।
(3) न्यासी की सेवानिवृत्ति या उसका हटाया जाना।
(4) नए न्यासियों की नियुक्ति।
VIII न्यासिक न्यासी की नियुक्ति।
IX लोक न्यास
(1) प्रकृति एवं कृत्य।
(2) लोक-न्यासी साधारण न्यासी के रूप में नियुक्ति।
(3) लोक-न्यासी की नियुक्ति एवं हटाया जाना।
(4) अभिरक्षक न्यासी एवं प्रबंध न्यासी के कर्त्तव्य अधिकार एवं दायित्व
(5) लोक न्यासी से संबंधित विशेष नियम।
X न्यासी के अधिकार
(1) प्रतिपूर्ति एवं क्षतिपूर्ति का अधिकार।
(2) न्यासीयता की संपूर्ति पर उन्मोचन का अधिकार।
(3) न्यास निधि को न्यायालय में जमा करने का अधिकार।
* ख्., पांडुलिपि में केवल शीर्षक उपलब्ध हैं, शेष पृष्ठ खाली छोड़ दिए गए है-संपादक