भाग -3 प्रमाण का भार - Page 190

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XI न्यासी एवं लाभग्राहियों का लोकन्यासी या न्यायालय की सहायता मांगने का अधिकार।

* (1) पदीय संपरीक्षा का अधिकार।

(2) न्यायालय का निर्देश लेने का अधिकार।

(3) न्यास को न्यायालय से प्रकाशित कराने का अधिकार।

(4) न्यायालय का निर्देश लेने का अधिकार (उपरोक्त 2 भी वही है)

(5) न्यायालय से न्यास को प्रशासित कराने का अधिकार।

XII न्यास भंग के परिणाम

  1. न्यास भंग की परिभाषा - न्यास भंग धारा 3 में परिभाषित है, न्यासी पर अधिरोपित कोई कर्त्तव्य भंग जो तत्समय लागू किसी विधि द्वारा न्यास भंग कहलाता है।

  2. अंग्रेजी विधि के अधीन - न्यासी की ओर से किसी कार्य की उपेक्षा जो न्यास विलेख की शर्तों या विधि द्वारा प्राधिकृत या क्षम्य नहीं है, न्यास भंग कहलाता है।

  3. कर्त्तव्य भंग - न्यासी के कर्त्तव्य, अधिकार, शक्तियां एवं अयोग्यताएं होती हैं। केवल कर्त्तव्य भंग ही न्यास भंग है।

(1) दायित्व का भाग न्यास संपत्ति की हानि है।

(2) क्या वह ब्याज देने के लिए दायी है? केवल निम्नलिखित स्थितियों में-

(अ) जहां वह ब्याज वास्तव में प्रापत कर चुका है।

(ब) जहां लाभग्राही को न्यास का धन अदा करने में अनुचित विलंब के रूप में

भंग है।

(स) जहां न्यासी को ब्याज प्राप्त कर लेना चाहिए था किन्तु उसने ऐसा नहीं

किया।

(द) जहां यह स्पष्टतः मान लिया जाए कि उसने ब्याज प्राप्त कर लिया होगा।

(ई) जहां भंग में न्यास का धन निवेश करने की एवं ब्याज या लाभांश एकत्र करने

की असफलता शामिल है।

(फ) जहां भंग में व्यवहार या व्यवसाय में न्यास की संपत्ति या उसके आगम के

प्रयोग शामिल हैं।

  1. क्या वह न्यास भंग से प्राप्त लाभ को न्यास भंग से हुई हानि के पूरा करने के लिए हकदार है?

वह ऐसा नहीं कर सकता।

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