2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय 2
(ग) भा.दं.सं. के अध्याय 12 के अधीन जाली सिक्का बनाने संबंधी किसी अपराध
के अभियुक्त व्यक्तिगण और उसी अध्याय में उसी सिक्के से संबंधित या दुष्प्रेरण
के या किसी ऐसे अपराध के करने के प्रयास के अभियुक्त व्यक्तिगण।
टिप्पणीः- विभिन्न व्यक्तियों के संयुक्त विचारण की प्रक्रिया के लिए आधार उसी लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रारंभ से लेकर अंत तक उनकी संगति है।
यह तथ्य कि उन्होंने अंतरालों पर अनक्रमिक कार्यों द्वारा अपनी योजना कार्यान्वित की, यदि योजना की अखंडता कार्यों की शृंखला को एक कार्य बनने से निष्पादित नहीं करती है अर्थात् उसी उद्देश्य को पूरा करना जो प्रथम से लेकर अंतिम कार्य तक उनका था।
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4. अभियुक्त एवं साक्षियों को उपस्थित करना।
यद्यपि न्यायालय ने एक अपराध का संज्ञान कर लिया है, वास्तविक दंड कार्यवाहियां तभी प्रारंभ हो सकती हैं जब अभियुक्त एवं साक्षीगण न्यायालय में उपस्थित हों, एक आरोप का उत्तर देने के लिए और दूसरे साक्ष्य देने के लिए।
वे न्यायालय के समक्ष किस प्रकार लाए जाने हैं?
धारा 104
- जब धारा 173 के अधीन किए गए अन्वेषण पर आधारित पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान
लिया जाता है तो अभियुक्त एवं साक्षीगण पहले ही न्यायालय के समक्ष होते हैं। 2. जब संज्ञान धारा 173 के अधीन पुलिस रिपोर्ट पर से अन्यथा किया जाता है तब
अभियुक्त एवं साक्षीगण न्यायालय के समक्ष नहीं होते हैं। वे न्यायालय के समक्ष
लाए जाने होते हैं।
उनको न्यायालय में लाने की क्या प्रक्रिया होती है?
दंड प्रक्रिया संहिता ऐसी दो प्रक्रियाएं अनुघात करती है।
धारा 68
- उपस्थित होने के लिए सम्मन, 2. गिरफतारी के लिए वारंट
(1) उपस्थित होने के लिए सम्मन
इस संहिता के अंतर्गत न्यायालय द्वारा निर्गत हर एक सम्मन लिखित दो प्रतियों में ऐसे न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा या ऐसे अन्य अधिकारी, जैसा उच्च न्यायालय समय-समय पर नियमतः निर्देश करे, के द्वारा हस्ताक्षरित एवं सीलबंद होगा।
- सम्मन पुलिस अधिकारी या स्थानीय सरकार द्वारा निर्धारित। इस हेतु ऐसे नियम के अधीन इसे निर्गत करने वाले न्यायालय के पदाधिकारी या अन्य लोक सेवक द्वारा तामील किया जाएगा।