174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
परिसीमा विधि पर भाषणों की रूपरेखा
I. परिचायक
अवधि विधि की प्रकृति।
अवधि, विविध-उपमति एवं अतिविलंबर के बीच प्रभेद।
अवधि, विधि का उद्देश्य
II. अवधि विधि का क्रम-विन्यास
- भारतीय संविधि विधि के अधीन व्ययगत समय का परिचालक।
- अधिनियम की योजना।
III. अधिनियम का लागू होना
क्षेत्र के संबंध में।
विशेष प्रक्रिया कार्यवाहियों के संबंध में।
दंड कार्यवाहियों के संबंध में।
सिविल कार्यवाहियों के संबंध में।
व्यक्तियों के संबंध में।
(विशेष विधि के विरुद्ध अपठनीय)
IV. स्तंभ 3 से उद्भूत होने वाले प्रश्न
समय कब चलना आरंभ होता है।
(1) सामान्य नियम ऐसे मामले जहां वाद करने का अधिकार प्रोद्भूत होने से पूर्व परिसीमा आरंभ होती है।
(2) ऐसे मामले जहां वाद करने का अधिकार प्रोद्भूत हो चुकने पर भी परिसीमा आरंभ नहीं होती है।
(3) ऐसे मामले जहां परिसीमा का नवीन प्रारंभिक बिन्दु उद्भूत होता है। टिप्पणः- भागों में उपभागों की संख्याएं मूल पांडुलिपि में जैसी है वैसी ही रखी