II. भारतीय परिसीमा विधि - Page 198

181

II. भारतीय परिसीमा विधि

इसकी व्यवस्था की योजना

भारतीय संविधिक विधि में समय के व्यपगमन का प्रचालन

  1. एक निश्चित कालावधि का व्यपगमन भारतीय संविधिक विधि के अधीन चार परिणाम उत्पन्न करता हैः-

(1) यह दोष के लिए उपचार प्राप्त करने में धारक के अधिकार को बढ़ाता है - परिसीमा अधिनियम की धारा 3

(2) यह न केवल उसका उपचार वर्णित करता है वरन् उसके अधिकार को समाप्त करता है - परिसीमा अधिनियम की धारा 28

(3) यह प्रकाश, हवा, मार्ग, पानी के बहाव, पानी के उपयोग या सुखाचार को एक व्यक्ति को प्रदत्त करती है जो उसे एक निर्धारित कालावधि तक उपभोग कर चुका है- परिसीमा अधिनियम की धारा 26

(4) यह सुखाचार के अधिकार को समाप्त करता है - 1882 के अधिनियम सं. (5) की धारा 47

(2), (3), (4) स्थितियां ऐसी हैं जो चिरभोगाधिकार विधि के अंतर्गत आती हैं। केवल (1) परिसीमा विधि के अंतर्गत आती है। परिसीमा अधिनियम विधि के मिश्रित निकायों के बारे में है और दोनों का अध्ययन पृथक-पृथक किया जाना चाहिए।