186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
लिए न्यास में निहित की गई है, को उपलभ्य नहीं होगा और न ही यह उसके विधिक प्रतिनिधि या समनुदेशिती को (मूल्यवान प्रतिफल के बिना समनुदेशिती को) संपत्ति के या उसके उत्पादनों या ऐसी संपत्ति के लेखे के प्रत्यादान के एक वाद में उपलभ्य नहीं होता है। यह धारा व्यावहारिक या अन्यायिक न्यास से भिन्न अभिव्यक्त न्यास में लागू होने वाली है। एक अन्यायिक न्यास का न्यासी अवधि का प्रतिवाद ले सकता है।
अभिव्यक्त न्यास और अन्यायिक न्यास में अंतर
अतः, व्यक्तिगण जो न्यासीय पद धारण कर रहे हैं, धारा 10 के अभिप्राय में न्यासीगण नहीं है, अर्थात् अभिकर्त्ता, प्रबंधक, आढ़ती, बेनामीदार, निष्पादक या प्रशासक, महाजन (बैंकर) उत्तरजीवी, भागीदार, समवाय - कंपनी का निदेशक, कंपनी का समापक, संयुक्त हिन्दू परिवार का कर्त्ता या व्यवस्थापक।
दूसरा धारा 10 उन व्यक्तियों, जिनमें संपत्ति एक विशिष्ट प्रयोजन के लिए न्यास में निहितऽ हो गई है, के वादों पर ही लागू होती है। 44 मद्रास 277 (281 - 2)
विशिष्ट प्रयोजन क्या है? विशिष्ट प्रयोजन ऐसा प्रयोजन है जो वस्तुतः एवं विशिष्टतः विलेख में परिभाषित है जिसके एक प्रयोजन के लिए न्यास सृजित किया जाता है। जिसको उल्लिखित शर्तों से निश्चिततः अभिपुष्ट किया जा सकता है।
49 I आई.ए. 37 (43)
58 I आई.ए. - I
ऐसा होने पर एक स्पष्ट न्यासी भी इस धारा के अंतर्गत आ जाएगा।
न्यासी का अर्थ है डी सनटार्ट
स्पष्टीकरण - हिन्दू, मुसलमान एसवं पूर्व विन्यास अभिव्यक्त न्यास घोषित किए जाते हैं और उनके प्रबंधक अभिव्यक्त न्यासीगण।
(iii) धारा 10 न केवल स्वयं व्यतिकर्मी न्यासी (स्वयं चूक करने वाले न्यासी) पर
ऽ निहित का क्या अर्थ है? निम्नलिखित वाद अपवर्जित किए गए हैंः-
- न्यासी को, जो वह प्राप्त कर सका है, के लिए उत्तरदायी बनाने की मांग करने वाले वाद।
- वादी की न्यास संपत्ति की व्यवस्था करने के लिए व्यक्तिगत अधिकार को प्रवर्तित करने के
वाद।
- जहां एक अवैध न्यास है, एक प्रतिफलित न्यास के प्रवर्तन में न्यासियों से संपत्ति के प्रत्यादान
के लिए एक वाद - 20 बंबई, 511
- न्यास भंग के लिए क्षतिपूर्ति के लिए वाद - 58 आई.ए. 279 (297)