IV. परिसीमा विधि - Page 207

190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. किसी व्यक्ति के विषय में जो वाद करने का अधिकार प्रोद्भूत होने से पूर्व मर जाता है, परिसीमा कब प्रारंभ होती है?

  2. किसी व्यक्ति के विषय में, जो अन्य व्यक्ति के उस पर वाद करने का अधिकार पाने से पूर्व मर जाता है, परिसीमा कब आरंभ होती है?

(i) जब कोई व्यक्ति वाद करने का अधिकार प्रोद्भूत होने से पूर्व मर जाता है परिसीमा काल तब आरंभ होगा जब मृतक का विधिक प्रतिनिधि ऐसे वाद प्रस्तुत करने के लिए सक्षम होगा।

(ii) जब कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध वाद करने का अधिकार प्रोद्भूत हो चुका है ऐसे प्रोद्भवन होने से पूर्व मर जाता है परिसीमा की समयावधि उस समय से परिकलित की जाएगी जब मृतक का एक विधिक प्रतिनिधि होगा, जिसके विरुद्ध वाद लाया जा सकता है।

मूल नियम का अपवाद परिसीमा लाने का अधिकार प्रोद्भूत होने के क्षण से ही शुरू हो जाता है

  1. ऐसे मामले जिनमें परिसीमा वाद करने के अधिकार के प्रोद्भूत होने से पूर्व आरंभ होती है।

(i) मांग पर देय धन एवं विपत्र पर देय धन या मांग पर कृत वचनपत्र रूक्का। इन वादों में जब तक कि देयता की मांग नहीं है एवं देयता की फलित स्वीकृत नहीं है, तो वाद लाने का अधिकार नहीं है। वाद लाने का अधिकार, देयता की अस्वीकृति के दिनांक से उद्भूत होता है। किन्तु समय अस्वीकृति के दिनांक से चलना आरंभ नहीं होता वरन् ऋण के दिनांक या विपत्र या वचन पत्र के दिनांक से चलना आरंभ होता है, अर्थात् वाद लाने के अधिकार के प्रोद्भूत हो चुकने से पूर्व। - 57-58-59-67-73

(ii) एक गिरवी का मोचन पर वाद

गिरवीदार का धरोहर की वापसी के लिए वाद लाने का अधिकार उद्भूत होता है उस दिनांक को जिसको गिरवी रखे-सामान के ऋण को उसके द्वारा चुकता कर दिया गया था किंतु समय का चलना देयता के दिनांक से नहीं वरन् धरोहर के दिनांक से आरंभ होता है, अर्थात् वाद लाने के अधिकार के प्रोद्भूत हो चुकने से पूर्व। - 145

वे मामले जिनमें परिसीमा प्रारंभ नहीं होती भले ही वाद लाने का अधिकार प्रोद्भूत हो गया हो। धारा 6, 7, 8

  1. ऐसे मामले होते हैं जहां एक व्यक्ति जिसे वाद लाने का अधिकार प्रोद्भूत

हो गया है, उस दिनांक को जिसको वाद लाने का अधिकार प्रोद्भूत हुआ

है, निर्योग्यता ग्रस्त है।

  1. इस अपवाद के अनुसार समय उस व्यक्ति के विरुद्ध नहीं चलेगा जो