IV. परिसीमा विधि - Page 208

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निर्योग्यता से ग्रस्त है। भले ही उस वाद को लाने का अधिकार प्रोद्भूत हो

चुका है।

  1. मात्र तीन प्रकार की निर्योग्यताएं मान्य हैं - (1) अशक्तता, (2) पागलपन,

(3) जड़ता।

  1. निर्योग्यता से ग्रस्त व्यक्ति के मामले में समय तब प्रारंभ होता है जब निर्योग्यता

समाप्त हो जाती है।

  1. जहां ये निर्योग्यताएं समवर्ती या उत्तरवर्ती रूप से प्रवर्तनशील हैं वहां परिसीमा

तब प्रारंभ होती है जब ऐसी सभी निर्योग्यताएं समाप्त हो गई हैं।

  1. जहां निर्योग्यता व्यक्ति की मृत्यु तक निरंतर बनी रहती है तब समय उसके

विधिक प्रतिनिधि के विरुद्ध उसकी मृत्यु की दिनांक से आरंभ होगा।

  1. यदि विधिक प्रतिनिधि व्यक्ति की मृत्यु तक निर्योग्यता के अधीन है तब तो

समय प्रारंभ होगा जब विधिक प्रतिनिधि की निर्योग्यता समाप्त हो जाती है।

  1. उन व्यक्तियों को जो संयुक्ततः परिसीमा के प्रारंभिक बिंदु पर वाद करने के

लिए हकदार है निर्योग्यता का क्या परिणाम होगा। दो मामले अवश्य प्रभेदित

होने चाहिएः-

(i) जहां उनमें से केवल कुछ निर्योग्यता के अधीन है।

(ii) जहां उनमें से सभी निर्योग्यता के अधीन है।

I. जहां केवल कुछ उनमें निर्योग्यता के अधीन हैः-

(i) जहां निर्योग्यता अनाधीगत के अधीन नहीं है वहां पक्ष द्वारा प्रतिवादी को पूर्ण मुक्ति या छुटकारा दिया जा सकता है। निर्योग्यता के अधीन व्यक्ति की सहमति के बिना, उन सभी के विरुद्ध वाद लाने के अधिकार के प्रोद्भूत होने के समय का चलना प्रारंभ हो जाएगा।

(ii) जहां ऐसी मुक्ति नहीं दी जा सकती है वहां समय उनमें से किसी के विरुद्ध नहीं चलेगा जब तक कि निर्योग्यता समाप्त हो जाए या जब तक निर्योग्यता के अधीन व्यक्ति विषय वस्तु में अपने हित को छोड़ देता है।

II. वे मामले जिनमें सभी व्यक्ति जो वाद करने के लिए हकदार है किसी निर्योग्यता के अधीन हैः-

(i) जहां सभी निर्योग्यता के अधीन है, तो धारा 6 में निर्धारित नियम लागू होगा।

(ii) जहां उनमें से एक का निर्योग्यता से पीडि़त होना समाप्त हो जाता है तो धारा 7 लागू होगी और शासी प्रश्न होगा कि यदि वह व्यक्ति जो अपनी निर्योग्यता से