IV. परिसीमा विधि - Page 209

192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

मुक्त है उनकी जो अपनी निर्योग्यता से निरंतर पीडि़त है सहमति के बिना वैध अनुमुक्ति देता है। यदि उत्तर सकारात्मक है तो समय सभी के विरुद्ध उसी क्षण से चलना आरंभ करेगा। जब से व्यक्ति की निर्योग्यता लागू होने से रुक गई है। यदि उत्तर नकारात्मक है तब समय उनमें से तब तक किसी के विरुद्ध नहीं चलेगा। जब तक उन सभी का उनकी निर्योग्यता से पीडि़त होना समाप्त नहीं हो जाता है।

  1. निर्योग्यता के अवसान के दिनांक से कितने समय के अंतर्गत उस व्यक्ति के द्वारा वाद अवश्य लाया जाना चाहिए जो जब उसके लिए वाद का अधिकार प्रोद्भूत होने पर निर्योग्यता के अधीन है।

  2. इस प्रश्न के तीन उत्तर हैंः-

(i) वाद करने के अधिकार के प्रोद्भवन के दिनांक से अगणित किए जाने वाले समय से निर्धारित समय के अंतर्गत यदि निर्योग्यता के अवसान के बाद छूटा हुआ काल तीन वर्षों से अधिक है।

दृष्टांत- निर्धारित समय - 12 वर्ष अर्थात् 1920 से 1932

निर्योग्यता के वर्ष - 4 वर्ष अर्थात् 1924 से 1936

छूटा हुआ काल - 9 वर्ष। वाद अवश्य 1932 से पूर्व लाना चाहिए। उद्भवन से 12 वर्षों के अंतर्गत निर्धारित समय के अंतर्गत। उसको तनिक भी लाभ नहीं मिलता है। यहां तक कि समय उसके वाद करने के अधिकार के उद्भवन से आगणित किया जाता है।

(ii) निर्योग्यता के अवसान से अगणित निर्धारित समयावधि के अंतर्गत यदि निर्धारित समय तीन वर्षों से कम है।

उसको अपनी निर्योग्यता से कोई फायदा नहीं मिलेगा। अपितु उसका समय उसकी निर्योग्यता के अवसान की दिनांक से प्रारंभ हो जाएगा।

दृष्टांत - निर्धारित समय - 1 वर्ष 1920 से 1921

निर्योग्यता के वर्ष - 4 वर्ष प्रा. वि. 1924 रोध 1925

वाद 1925 में अवश्य लाना चाहिए।

(iii) निर्योग्यता के अवसान की दिनांक से तीन वर्षों के अंतर्गत यदि निर्योग्यता के अवसान के बाद छूटा हुआ समय तीन साल से कम है और निर्धारित समय तीन वर्षों से अधिक है।

निर्धारित कालावधि - 6 वर्ष 1920 से 1926

निर्योग्यता के वर्ष - 4 वर्ष 1924 से 1930

अवसान के वाद छोड़ा गया समय है - 2 वर्ष।