4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
धारा 73
स्थानीय सीमाओं के बाहर सम्मनों की तामील।
जब एक न्यायालय इच्छा करता है कि उसके द्वारा निर्गत सम्मन उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं से बाहर किसी स्थान पर तामील किया जाएगा तो वह साधारणतः ऐसे सम्मन को दो लिपियों में मजिस्ट्रेट को भेजेगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं में समनित व्यक्ति रहता है या जहां तामील होना है।
धारा 74
ऐसे वादों में, जब तामील कर्त्ता उपस्थित न हो, तामील का सबूत।
- मजिस्ट्रेट के समक्ष किए जाने के लिए तात्पर्यित यह शपथपत्र कि ऐसे सम्मन
तामील कर दिए गए हैं और सम्मन की प्रतिलिपि (धारा 69 एवं धारा 70 द्वारा
प्रावधानित ढंग से) उस व्यक्ति द्वारा जिसको वह दिया था या प्रस्तुत किया था
या जिसके पास इसे छोड़ गया था, पृष्ठांकित किए जाने के लिए तात्पर्यित साक्ष्य
में स्वीकार करने योग्य होगा और इसमें किया कथन जब तक विपरीत/प्रतिकूल
साबित न कर दिया जाए, सही समझा जाएगा।
- इस धारा में वर्णित शपथ पत्र सम्मन की प्रतिलिपि के साथ संलग्न किया जा
सकता है और न्यायालय को लौटाया जा सकता है।
वकील पर तामील पर्याप्त नहीं है।
6 सी.डब्ल्यू.एन. 927
प्रतिलिपि तामील होनी चाहिए और उसे मात्र दिखलाना पर्याप्त नहीं है।
5 बी.एच.सी.आर. 20
प्रस्तुतिकरण तामील के बराबर है यदि सम्मन अस्वीकार किया जाता है।
28 एम.एल.एफ. 505
सम्मन को प्राप्त करने (लेने) से इंकार करना कोई अपराध नहीं है।
II . गिरफतारी का वारंट
धारा 75
- गिरफतारी का वारंट लिखित रूप में होगा, पीठासीन अधिकारी या एक मजिस्ट्रेट की न्यायपीठ की स्थिति में ऐसी न्यायपीठ के किसी सदस्य द्वारा हस्ताक्षरित होगा और उस पर न्यायालय की मुहर लगी होगी।
जब तक कि न्यायालय, जिसने उसे निर्गत किया था, के द्वारा निरस्त नहीं किया जाता है या जब तक निष्पादित नहीं हो जाता है तब तक वारंट प्रवर्तित रहेगा।