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2. सम्मन एवं वारंट में अंतर
सम्मन समनित व्यक्ति के लिए एक आदेश है।
वारंट गिरफतार होने वाले व्यक्ति के लिए एक आदेश नहीं है। अतः सम्मन की अवज्ञा के लिए व्यक्ति दंडित किया जा सकता है। किन्तु वह वारंट की अवज्ञा के लिए दंडित नहीं किया जा सकता है।
5 डब्ल्यू.आर.डी. -71
धारा 76
न्यायालय प्रतिभूति लेने के लिए निर्देशित कर सकता है।
- निर्गत करने वाला न्यायालय अपने विवेक से वारंट पर पृष्ठांकन करके निर्देशित
कर सकता है कि यदि ऐसा व्यक्ति एक विनिर्दिष्ट समय पर न्यायालय के समक्ष
अपनी उपस्थिति के लिए पर्याप्त प्रतिभूतियों के साथ बंधपत्र निष्पादित करता है
और उसके बाद न्यायालय के द्वारा जब तक अन्यथा निर्देशित न किया जाए, वह
अधिकारी जिसके लिए वारंट निदेशित किया गया था ऐसी प्रतिभूति लेगा और ऐसे
व्यक्ति को अभिरक्षा से रिहा कर देगा।
- पृष्ठांकन व्यक्त करेगा -
(अ) प्रतिभूतियों की संख्या।
(ब) वह धनराशि, जिसमें वे एवं व्यक्ति जिसकी गिरफतारी के लिए वारंट निर्गत
किया जाता है, से अलग बंधित किए जाने हैं।
(स) वह समय जिस पर न्यायालय के समक्ष उसको उपस्थित होना है। 3. जब कभी इस धारा के अधीन प्रतिभूति ली जाती है तो वह अधिकारी जिसके
लिए वारंट निदेशित किया जाता है बंधपत्र न्यायालय को अग्रसारित करेगा।
धारा 77
- वारंट किसको निदेशित।
साधारणतः वारंट एक या अधिक पुलिस अधिकारियों को निदेशित किया जाएगा और जब प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट द्वारा निर्गत किया जाता है तो हमेशा इसी प्रकार निदेशित किया जाएगा, किन्तु कोई अन्य मजिस्ट्रेट ऐसा वारंट निर्गत करने वाला यदि उसका तुरंत निष्पादन आवश्यक है और कोई पुलिस अधिकारी तुरंत उपलब्ध नहीं है उसे किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों को निदेशित कर सकता है, और ऐसा व्यक्ति या व्यक्तिगण से निष्पादित करेगा/करेंगे।
- एक से अधिक व्यक्तियों के लिए संबोधित/सम्प्रेषित वारंट।
सबके द्वारा या उनमें से किसी एक या एक से अधिक द्वारा निष्पादित किया जा सकता है।