194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(i) जहां अभिस्वीकृति है।
(ii) जहां आंशिक भुगतान है।
(iii) जहां वाद कारण एक संविदा के निरंतर भंग होने से उद्भूत होता है या संविदा से स्वतंत्र एक निरंतर दोष से उद्भूत होता है।
धारा - 19 - अभिस्वीकृति
1. सामान्यतया
- अभिस्वीकृति परिसीमा की समयावधि के वास्तविक प्रवर्तित होने से पूर्व
अवश्य की जानी चाहिए। समयावधि के प्रवर्तित हो चुकने के बाद की गई
अभिस्वीकृति किसी उपयोग की नहीं और परिसीमा का एक नवीन प्रारंभिक
बिंदु नहीं दे सकती है।
अभिस्वीकृति लिखित हो।
अभिस्वीकृति उत्तरदायी पक्ष या दायित्व की अभिस्वीकृति पर हस्ताक्षर करने
के लिए उचिततः अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित हो।
अभिस्वीकृति लेनदार के प्रति होनी आवश्यक नहीं।
अभिस्वीकृति में विद्यमान दायित्व की स्वीकारोक्ति अवश्य हो। इसमें अदा
करने के वायदे का होना आवश्यक नहीं है। वास्तव में यह अदा करने की
इंकारी या मंजूरी करने के दावे के साथ जोड़ी जा सकती है।
II. धारा 21 (2) संयुक्त रूप से उत्तरदायी व्यक्तियों द्वारा अभिस्वीकृति
- जब संपत्ति या अधिकार का दावा ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध किया जाता है जो संयुक्त रूप से उत्तरदायी है जैसे संयुक्त-ठेकेदार, भागीदार, निष्पादक, बंधक, बंधकियों आदि तो अभिस्वीकृति उनमें से एक या किसी एक के अभिकर्ता द्वारा शेष को प्रभार्य बना देता है।
III. धारा 21 (3) हिन्दू विधवा द्वारा अभिस्वीकृति
हिन्दू विधवा या अन्य सीमित स्वामी द्वारा अभिस्वीकृति उत्तरभोगियों पर बाध्यकारी होगी।
धारा 21 (3) हिन्दूकर्त्ता द्वारा अभिस्वीकृति।
वहां संयुक्त हिन्दू परिवार के कर्ता (या उसके अभिकर्ता) द्वारा हस्ताक्षरित जहां अभिस्वीकृति समग्र परिवार द्वारा या उसके पक्ष में उपगत दायित्व के संबंध में है, अभिस्वीकृति समग्र परिवार पर बाध्यकारी होगी।
ब्रिटिश भारत में दंड प्रक्रिया-विधि
यू.एस.ए. (संयुक्त राज्य अमरीका) के संविधान में एक खंड इस प्रकार हैः-
फ्किसी भी नागरिक के प्राण, स्वतंत्रता एवं संपत्ति विधि की सम्यक प्रक्रिया से