196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
दंड न्यायालयों का गठन
इस विषय को उचित रूप से समझने के लिए प्रेसीडेंसी नगर व्यवस्था और प्रांतीय-व्यवस्था के बीच प्रभेद को जान लेना आवश्यक है। इस प्रकार का प्रभेद भारत में अन्य विधियों के विषय में भी प्रायः किया जाता है। जैसेः
दिवाला -
(1) पे्रसीडेंसी नगर दीवाला अधिनियम।
(2) प्रांतीय दीवाला अधिनियम।
लघुवाद -
(1) प्रेसीडेंसी नगर लघुवादी न्यायालय अधिनियम।
(2) प्रांतीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम।
(अ) प्रांतीय व्यवस्था
1. सेशन न्यायालय
धारा - 7 (1)
8. (1) प्रत्येक प्रांत एक सत्रीय खंड होगा या एक से अधिक सत्री खंडों में विभाजित होगा। प्रत्येक सत्रीय खंड जिला या एक से अधिक जिलों के साथ संलग्न होगा।
धारा 9 (3)
- किसी भी सत्रीय खंड के लिए एक या अधिक सत्रीय न्यायालयों में
अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए अपर सेशन न्यायाधीश या सहायक
सेशन न्यायाधीश हो सकते हैं।
धारा 9(2)
- सेशन न्यायालय अपनी बैठक ऐसे स्थान या स्थानों पर आयोजित करेगा जिसे
(एल.जी.) स्थानीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित करे।
धारा 9(4)
- एक खंड के सेशन न्यायाधीश को दूसरे खंड में अपर सेशन न्यायाधीश नियुक्त
किया जा सकता है, वह वहां के खंडों में वादों का निपटान करेगा।
2. मजिस्ट्रेट न्यायालय
9. 1. जिला मजिस्ट्रेट
धारा 10
(1) प्रत्येक जिले में प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट होगा जो जिला मजिस्ट्रेट