IV. परिसीमा विधि - Page 214

197

कहलाएगा।

(2) प्रथम श्रेणी का कोई भी मजिस्ट्रेट अपर जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त किया जा सकता है।

2. उप-खंड मजिस्ट्रेट

धारा 8(1)

  1. एक जिला उपखंड में उपविभाजित किया जा सकता है।

धारा 13(1) एवं (2)

प्रथम या द्वितीय श्रेणी का मजिस्ट्रेट उपखंड का प्रभारी बनाया जा सकता है और (वह) उपखंड/परगना मजिस्ट्रेट कहलाएगा।

(3) अवर/अधीनस्थ मजिस्ट्रेट

धारा 12 (1)

  1. प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट के अतिरिक्त प्रथम, द्वितीय या तृतीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जा सकते हैं।

वे ऐसे स्थानीय क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करेंगे, जैसा कि प्रत्येक के संदर्भ में परिभाषित होगा।

धारा 12(2)

यदि ऐसा कोई क्षेत्र नियत नहीं किया जाता है तो उनकी अधिकारिता एवं शक्ति समग्र उप खंड/परगना में व्याप्त होंगी।

3. जिला मजिस्ट्रेट और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

संहिता (कोड) प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी मजिस्ट्रेट के सिवाए किसी विशिष्ट न्यायालय के जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय के रूप में मान्यता प्रदान नहीं करती है।

जहां अनुवीक्षण स्थानापन्न जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रारंभ किया गया, उसके समापन से पूर्व वह अपने मौलिक पद, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के रूप में प्रत्यावर्तित कर दिया गया, वह किस हैसियत से अधिकारिता का प्रयोग उस अपराध पर करेगा, जो निर्णीत हुआः उसको अनुवीक्षण को निरंतर रखने की अधिकारिता है।

सम्राट बनाम सैयद सज्जाद हुसैन 3 ए.एल.जे. 825

  1. जहां तक मौलिक अधिकारिता का संबंध है, जिलाधिकारी खंड के बाहर किए गए अपराध के संबंध में जो कुछ कर सकता था परंतु एक उपखंड मजिस्ट्रेट अपनी स्थानीय अधिकारिता में ही अनुवीक्षण करने में सक्षम होता है। 4 ए - 366