IV. परिसीमा विधि - Page 215

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

4. विशेष मजिस्ट्रेट

धारा-14(1)

  1. (1) किसी भी स्थानीय क्षेत्र में लोग प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी मजिस्ट्रेट की शक्तियों से, किसी विशेष वादों या वादों की श्रेणियों के विषय में सामान्यतः वादों के संबंध में, संपन्न किए जा सकते हैं।

(2) विशेष मजिस्ट्रेट कहलाने के लिए और विशेष पद निर्धारित करने के लिए।

(3) ऐसा एक व्यक्ति उसके नियंत्रण में एक अधिकारी हो सकता है।

(4) यदि वह एक पुलिस अधिकारी है, वह सहायक जिला अधीक्षक से नीचे

का नहीं होगा, और उसके लिए जो आवश्यक है उससे अधिक कोई शक्ति

नहीं होगीः

(i) शांति बनाए रखना।

(ii) अपराध रोकना।

(iii) मजिस्ट्रेट के समक्ष लाने के लिए अपराधियों को खोजना।

(iv) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा उस पर अधिरोपित अन्य कर्त्तव्यों का

उसके द्वारा निर्वहन।

5. न्यायपीठ मजिस्ट्रेट

धारा 15(1)

  1. कोई दो या अधिक मजिस्ट्रेट न्यायपीठ के रूप में एक साथ बैठ सकते हैं और केवल ऐसे वादों या वादों के वर्गों को सुन सकते हैं जो ऐसी स्थानीय परिधियों में विधि द्वारा इसके लिए निर्धारित हों।

6. प्रांतीय व्यवस्था में विभिन्न न्यायालयों का संबंध

धारा 17(2)

  1. एक उपखंड में प्रत्येक न्यायपीठ एवं प्रत्येक मजिस्ट्रेट उपखंड मजिस्ट्रेट के अधीन होगा। उपखंड में जिला मजिस्ट्रेट की अधिकारिता समन्वयात्मक है। 4 इलाहाबाद 366

वह मजिस्ट्रेट जो एक उपखंड मजिस्ट्रेट (एस.डी.एम.) के अधीन है (डी.एम.) जिला मजिस्ट्रेट के भी अधीन होगा। न्यायपीठ एवं मजिस्ट्रेट उपखंड मजिस्ट्रेट सहित सभी जिला मजिस् ट्रेट के अधीन है।

धारा 10(3)

एक अपर जिला मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट के अधीन केवल निम्न प्रयोजन के लिए होगाः-