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(i) धारा 192 (1)
(ii) धारा 40 (2)
(iii) धारा 528 (2) एवं (3)
धारा 17 (3)
सभी सहायक सत्रीय न्यायाधीश, सत्रीय न्यायाधीश के अधीन है। जिसकी अधिकारिता में वे अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हैं।
- अधीनस्थ - (1) पंक्ति में अवर
9 बंबई 100
8 मद्रास 18 (एफ.बी.)
(2) न्यायिक के साथ ही कार्यकारी शक्तियों में अवर
2 इलाहाबाद, 205 (एफ.बी.)
9 बंबई - 100 - अधीनता के बिना अवरता हो सकती है, किंतु बिना अवरता के अधीनता नहीं हो सकती, चूंकि अधीन का अभिप्राय है पंक्ति में अवर।
धारा 17 (5)
न तो जिला मजिस्ट्रेट न मजिस्ट्रेट एवं न्यायपीठ सत्रीय न्यायाधीश के अधीन होंगे सिवाए संहिता (कोड) में स्पष्ट प्रावधानों के।
सत्रीय न्यायाधीश के अधीन केवल धारा - 123, 193, 195, 408, 431, 436, 437 के प्रयोजन के लिए हैं। यदि सत्रीय न्यायाधीश नियमित करता है कि दलालों को न्यायालय में प्रवेश नहीं होने देना चाहिए, तो यह मजिस्ट्रेट वर्ग पर लागू नहीं होगा।
जहां तक कार्य के विनियमन का संबंध है अधीनस्थ का अभिप्राय मात्र अधीनस्थ नहीं है। अधीनस्थ का यह भी अर्थ है न्यायिकतः पंक्ति में अवर अर्थात् कोई न्यायालय जिस पर एक दूसरा न्यायालय धारा 435 के अधीन कार्यवाही कर सकता ळै (अभिलेख का रखरखाव करें एवं आदेश पारित करें)।
9 बंबई 100