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धारा 1 द्वारा लैटर्स पेटेंट द्वारा साम्राज्ञी को बंगाल में कलकत्ता में, बंबई में बंबई के लिए और मद्रास में मद्रास के लिए उच्च न्यायालय बनाने एवं स्थापित करने के लिए शक्ति संपन्न किया गया।
धारा 9
इस अधिनियम की धारा 106 के अधीन स्थापित प्रत्येक उच्च न्यायालय ऐसे सभी सिविल, दंडिक, सागरीय न्यायाधिकार, उपसमुद्री न्यायाधिकरणीय दित्सापत्रीय/वसीयती, एवं वैवाहिक आरंभिक एवं अपीलीय अधिकारिता और सभी इस प्रकार शक्तियां एवं प्राधिकार के लिए एवं न्याय प्रशासन के संबंध में जो उस प्रेसीडेंसी में, जिसमें यह स्थापित किया जाता है, को महामहिम सम्राट प्रदान एवं निदेशित करें।
उच्च न्यायालय की अधीक्षण की शक्ति
3 पट एल.जे. 581.7 बी
शिव नंदन बनाम सम्राट।
- उच्च न्यायालय की अधीक्षण की शक्तियां 1861 के अधिनियम की धारा 15 (धारा
107 - भारत शासन अधिनियम) अपीलीय अधिकारिता के अधीन न्यायालयों तक
सीमित है।
- किंतु जहां उच्च न्यायालय यहां तक कि एक अवर न्यायालय से किंचित रुपांतरित
रूप में अधिकारिता रखता है, वह उन वादों में भी जो अपील के अधीन नहीं है
उस अवर न्यायालय पर अधीक्षण रखेगा।
- विचार करने के लिए वादों के तीन वर्ग हैंः-
(अ) जहां अवर न्यायालय उच्च न्यायालय की अपीली अधिकारिता के अधीन है
वहां कुछ मामलों में मात्र अधीक्षण का अधिकार विद्यमान है और इसका
निष्पादन उन वादों तक सीमित नहीं है जहां अपील का अधिकार उच्च
न्यायालय को होता है। अधीक्षण की विशेष शक्ति का प्रयोग नियमित रूप
से उन वादों में जहां अन्य कार्यवाहियों द्वारा उपयुक्त उपचार, जिसे अपील
या पुनरीक्षण नियम के तौर पर नहीं किया जाता है।
(ब) उन वादों में जिनमें उच्च न्यायालय को अधीनस्थ के ऊपर पुनरीक्षण शक्ति
प्राप्त है या उच्च न्यायालय को निर्देश करने की शक्ति विद्यमान है, किंचित
रुपांतरित अपील का विद्यमान होना कहा जाता है।
(स) अधीक्षण की शक्ति उच्च न्यायालय को अधिनियम के द्वारा प्रदान की जा
सकती है। धारा 15 चार्टर अधनियम से स्वतंत्रतः अवर न्यायालयों को गठित
करके।