202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
- उच्च न्यायालय के अधीक्षण के अधीन हुए बिना भी न्यायालय स्थापित किया जा
सकता है।
उच्च न्यायालय का अन्य दंड न्यायालयों से संबंध
धारा 15, 107
प्रत्येक उच्च न्यायालय को अधीक्षण की शक्ति होगी, जो उसकी अपीली अधिकारिता के अधीन हो सकती है, और उसको जवाब आदि मंगाने की शक्ति होगी।
उसकी अपीलीय अधिकारिता के अधीन कौन से न्यायालय हैं?
लैटर्स पेटेंट
उच्च न्यायालय प्रेसीडेंसी में दंड न्यायालयों के विरुद्ध अपील न्यायालय होगा।
3 पट एल.जे. 5817 - बी. शिवनंदन बनाम सम्राट
दो प्रश्न -
(1) क्या उच्च-न्यायालय को अधीक्षण की शक्ति है उसको अपील की शक्ति नहीं है बल्कि केवल पुनरीक्षण या निर्देश की शक्ति है?
(2) क्या प्रेसीडेंसी में ऐसा दंड-न्यायालय हो सकता है जो उसकी अधीक्षण शक्ति के अधीन नहीं होगा?
अधिकारिता की स्थानीय सीमाएंः-
(1) जिला मजिस्ट्रेट की जिला है।
(2) उपखंड मजिस्ट्रेट की उपखंड है।
(3) अवर मजिस्ट्रेट का, ऐसा क्षेत्र जैसा कि स्थानीय सरकार निर्धारित करे।
(4) विशेष मजिस्ट्रेट, ऐसा स्थानीय क्षेत्र जो स्थानीय सरकार निर्धारित करे।
(5) प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट की।
प्रत्येक प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट, प्रेसीडेंसी नगर में जिसके लिए वह नियुक्त किया गया है सभी जगहों में अधिकारिता का प्रयोग करेगा और ऐसे नगर के अंदर के बंदरगाह एवं कोई नाव परिवहन के योग्य नदी या नहर वहां तक आती हुई की सीमा तक चूंकि ऐसी सीमाएं विधि में परिभाषित है।
(6) सेशन न्यायाधीश की उसके सेशन खंड में।
(7) उच्च न्यायालय।
लैटर्स पेटेंट द्वारा प्रदत्त दांडिक मामलों में क्या शक्तियां हैं?
- लैटर्स पेटेंट निर्देशित करता है कि उच्च न्यायालय की अधिकारिता निम्नानुसार