IV. परिसीमा विधि - Page 220

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होगीः-

उच्च न्यायालय की दांडिक अधिकारिता -

असाधारण लैटर्स पेटेंट

साधारण असाधारण लैटर्स पैरा पेटेंट पैरा

लैटर्स पेटेंट पैरा लैटर्स पेटेंट पैरा 27, 28, 29

22 एवं 23 24

  1. साधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिताः- उच्च न्यायालय की आरंभिक दांडिक अधिकारिता स्थानीय सामान्य आरंभिक सिविल अधिकारिता की सीमाओं के अंतर्गत होगी।

  2. असाधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिताः- उच्च न्यायालय की असाधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिता उसके अधीक्षण के अधीन किसी भी न्यायालय की अधिकारिता के भीतर के स्थानों में होगी।

  3. अपीलीय दांडिक अधिकारिताः- उच्च न्यायालय अपने अधीक्षण के अधीन प्रेसीडेंसी और सभी अन्य न्यायालयों के विरुद्ध अपील न्यायालय होगा और प्रवर्तन में किसी विधि के आधार पर ऐसे वादों में जो कथित उच्च न्यायालय की अपील के अधीन है, अधिकारिता का प्रयोग करेगा।

फरार बंदी दंडादेश

धारा - 396

(1) जब एक फरार बंदी पर दंडादेश पारित किया जाता है, तब ऐसा आदेश यदि मृत्यु या जुर्माना, या कोड़े लगाना हो तो इसके बाद अंकित प्रावधानों के अधीन रहते हुए तुरंत प्रभावी होगा और यदि जेल में हो तो दंडनीय अधिसेवित या कालापानी निम्न नियमानुसार प्रभावी होगा - अर्थात् -

  1. यदि नवीन दंडादेश, अपनी प्रकार का उस दंडादेश से जिसके अधीन बंदी जेल भुगत रहा था, कठोर हैं, जब वह फरार हुआ था तो नवीन दंडादेश तुरंत प्रभावी होगा।

  2. जब नवीन दंडादेश उस दंडादेश से जिसे ऐसा बंदी जो वह फरार हुआ था भोग रहा था कठोर नहीं है। तो नवीन दंडादेश उसकी सजा पूरी होने के बाद प्रभावी होगा_ दंडनीय अधिसेविता या कालापनी, जैसी भी स्थिति हो, आगे अवधि के लिए उसके बराबर हो, जो उसके फरार के समय पर उसके पूर्व दंडादेश के व्यतीत होने में शेष रह गया था।