IV. परिसीमा विधि - Page 221

204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

स्पष्टीकरणः इस धारा के प्रयोजन के लिएः-

(अ) निर्वासन या दंडनीय अधिसेविता का दंडादेश, बंदीकरण के आदेश से कठोरतर

समझा जाएगाः

(ब) एकांतवास के साथ ही कारावास का आदेश, उसी वर्णन के एकांतवास के

साथ कारावास के आदेश से कठोरतर समझा जाएगा_ और

(स) कठोर कारावास का दंडादेश एकांतवास सहित या बिना साधारण कारावास

के दंडादेश से कठोरतर समझा जाएगा।

397. पहले से ही सजा भुगत रहे व्यक्ति पर दंडादेशः-

जब कोई व्यक्ति पहले से ही कारावास के दंडनीय अधिसेवित या निर्वासन कारावास के दंड को भोग रहा है और उसे कारावास दंडनीय अधिसेवित या निर्वासन की सजा दी जाती है तो ऐसा कारावास दंडनीय अधिसेविता या निर्वासन के समाप्त होने पर प्रारंभ होगा जब तक कि न्यायालय निर्देशित न करे कि यदि वह कारावास भुगत रहा है और पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि निर्वासन के लिए है तो न्यायालय अपने सविवेकाधिकार द्वारा निर्देशित कर सकता है कि पश्चात्वर्ती दंडादेश तुरंत लागू होगा या उस कारवास की समाप्ति पर, जिसके लिए वह पूर्णतः दंडादेश तुरंत लागू होगा या उस कारावास की समाप्ति पर जिसके लिए वह पूर्णतः दंडादेशित किया गया हैः शर्त यह भी है कि जहां कोई व्यक्ति धारा 123 के अधीन एक आदेश द्वारा प्रतिभूत कारावास के लिए दंडादेशित है, वह पूर्वकृत अपराध के लिए सजा भुगत रहा है, पश्चात्वर्ती दंडादेश तुरंत प्रारंभ होगा।

398-(1) धारा 396 या 397 में किसी बात से किसी व्यक्ति को, जिसके लिए वह पूर्ण की या बाद की दोषसिद्धि के लिए उत्तरदायी है, दंड का कोई भी भाग माफ नहीं किया जाएगा।

(2) 399 युवा अपराधियों का सुधार गृहों में परिरोध।

(पांडुलिपि में पृष्ठ खाली है - संपादक)

दंडादेशों का निलंबन परिहरण एवं लघुकरण

(पांडुलिपि में पृष्ठ खाली छूटा हुआ है - संपादक)

धारा 401

सपरिषद वायसराय या स्थानीय सरकार किसी दंडादेश को शर्त पर या बिना शर्त निलंबित या परिहरित कर सकता है।