भाग -4 अपराधी का विचारण - Page 225

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

परिवाद सपरिषद् वायसराय, स्थानीय सरकार या सपरिषद् में वायसराय द्वारा इस हेतु शक्ति संपन्न किसी अधिकारी के आदेश या उससे किसी प्राधिकार के अधीन हो।

यदि वे उपधारा (2) के अधीन आते हैं तो मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट कार्यवाहियां प्रारंभ करने के लिए लिखित आदेश द्वारा सम्मति दे दी हो।

धारा 197

अपने अभिकथित पदीय कर्त्तव्यों के निर्वहन में काम करते हुए या तात्पर्यिक मजिस्ट्रेटों एवं लोक सेवकों का अभियोजन।

कोई न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान तभी लेगा जब स्थानीय सरकार की सम्मति ले ली गई हो। अन्यथा नहीं।

(2) ऐसी स्थानीय सरकार उस व्यक्ति को जिसके द्वारा उस पद्धति को जिसमें अपराध या अपराधों को, जिनके लिए ऐसे न्यायाधीश आदि का अभियोजन तय कर सकती है, किया जाता है और इस न्यायालय के जिसके समक्ष विचारण किया जाना है विनिर्दिष्ट कर सकती है।

धारा 198

संविदा भंग या मान हानि या विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन। कोई संज्ञान नहीं, सिवाय ऐसे अपराधों से पीडि़त किसी व्यक्ति द्वारा किए गए परिवाद पर। परंतुकः कुछ मामलों में कोई अन्य व्यक्ति न्यायालय की अनुमति के साथ उस (पु.) या उस (स्त्री) की ओर से परिवाद कर सकता है।

धारा 199

जारकर्म या एक विवाहित नारी को फुसलाने के लिए अभियोजन - कोई संज्ञान नहीं सिवाए ऐसी स्त्री के पति या उसकी अनुपस्थिति में न्यायालय की अनुमति के साथ, किसी व्यक्ति के, जो ऐसे व्यक्ति की देखरेख उस (पति) की ओर से करता था जब अपराध किया गया था के द्वारा परिवाद करने पर।

पुलिस रिपोर्ट

यह किस प्रकार प्रारंभ की जाती है।

यह तथाकथित प्रथम सूचना से प्रारंभ होती है। सूचना सामान्यतः पीडि़त पक्ष द्वारा दी जाती है। किंतु यह किसी भी पक्ष द्वारा दी जा सकती है। यहां तक कि एक पुलिस अधिकारी अपने प्रज्ञान पर आधारित ऐसी सूचना दे सकता है। यही नहीं, वरन् कुछ मामलों में, कुछ व्यक्तियों को विधि सूचना देने के लिए बाध्य करती है।

धारा 44

प्रत्येक व्यक्ति कुछ अपराधों की सूचना मजिस्ट्रेट या पुलिस को देगा।