210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(2) मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों का अन्वेषण करने के लिए घटना स्थल
पर जाएगा_ और
(3) यदि आवश्यक हो तो अपराधी को खोजने एवं गिरफतार करने के लिए
(आवश्यक) कार्यवाही करेगा।
बशर्ते
(अ) कि सूचना नामजद है और अपराध गंभीर प्रकार का नहीं है, तो अधिकारी को घटना स्थल पर अन्वेषण करने के लिए व्यक्तिशः जाने की आवश्यकता नहीं है।
(ब) कि यदि अधिकारी सोचता है कि अन्वेषण करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं है तो वह परिवाद का अन्वेषण नहीं करेगा।
वह अपनी कथित रिपोर्ट में धारा की अपेक्षाओं का पूर्णतः पालन न करने के अपने कारणों को वर्णित करेगा।
उसे सूचना देने वाले को अधिसूचित करना चाहिए कि वह मामले या घटना की जांच नहीं करेगा या अन्वेषण करना कार्यान्वित करेगा। किंतु इस प्रकार पुलिस का हाथ
खींच लेना अपराधी के अभियोजन को नहीं रोक सकता। इसके भी दो उपाय हैं।
धारा 159
1 . मजिस्ट्रेट ऐसी रिपोर्ट प्राप्त होने पर अन्वेषण के लिए निर्देश कर सकता है या तुरंत कार्यवाही कर सकता है या अवर मजिस्ट्रेट से प्रारंभिक जांच करने के लिए कह सकता है या वाद द्वारा प्रदत्त ढंग से वाद को अन्यथा निपटाने का निदेश कर सकता है।
यह अन्वेषण के पूर्ण होने से पूर्व एक प्रारंभिक रिपोर्ट है। मजिस्ट्रेट धारा 159 के अधीन कार्यवाही कर सकता है। किंतु यदि रिपोर्ट अन्वेषण के बाद प्रस्तुत की जाती है तो मजिस्ट्रेट को इस धारा के अधीन कार्यवाही करने का अधिकार नहीं है।
II. पीडि़त पक्ष आवेदन कर सकता है।
यदि पुलिस कार्यवाही नहीं करती है, तब उनके पास निम्नानुसार शक्तियां हैंः-
धारा 160
(1) लिखित आदेश द्वारा साक्षियों की उपस्थिति की अपेक्षा करना।
इस धारा के अधीन साक्षियों से सत्य करने की अपेक्षा नहीं की जाती है।
यदि वे झूठा साक्ष्य देते हैं तो उनको अभियोजित नहीं किया जा सकता है।
वे इस पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं।
यह पुलिस के समक्ष दिया जाता है।