भाग -4 अपराधी का विचारण - Page 229

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

तलाशी

धारा 165

(1) अन्वेषण की अवधि में एक पुलिस अधिकारी इसे आवश्यक समझ सकता है कि उसे किसी स्थान की तलाशी लेनी है।

ऐसा अधिकारी, अपने विश्वास के कारणों को अभिलिखित करने के बाद जहां तक संभव है, उस वस्तु को लिखित करते हुए जिसके लिए तलाशी करनी है, तलाशी करने के कारणों को लिखित करके कि उसके प्रभार के थाने की सीमा में तलाशी करने के कारणों को लिखित करके।

(2) पुलिस अधिकारी जहां तक संभव हैं, व्यक्तिशः तलाशी लेगा।

(3) वह अपने अधीनस्थ को, अभिलिखित उस स्थान और चीज को विनिर्दिष्ट करके जिसकी तलाशी ली जानी है, लिखित रूप में अधिकृत कर सकता है।

(4) संहिता के प्रावधान जैसे कि वारंट तलाशी और तलाशी की धारा 102 एवं 103 में अंतिम सामान्य प्रावधान लागू होंगे।

(5) तलाशी के दौरान तैयार किए गए अभिलख की प्रतिलिपियां निकटतम मजिस्ट्रेट के पास भेजी जाएंगी और मालिक या प्रतिलिपि करने वाले को अभिलेख की एक प्रतिलिपि शुल्क अदा करने पर दी जाएगी।

धारा 166

पुलिस अधिकारी किसी अन्य थाने के क्षेत्र में तलाशी करवा सकता है।

धारा 167

(1) यदि अन्वेषण धारा 61 द्वारा निर्धारित 24 घंटों में पूर्ण नहीं किया जा सकता है और विश्वास करने के आधार है कि अभियोग की सूचना का ठोस आधार है तो पुलिस यहां इसके वाद के मामले के संबंध में निर्धारित डायरी में प्रविष्टियों की एक प्रतिलिपि तुरंत निकटतम मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा और उसी समय अभियुक्त को ऐसे मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।

(2) मजिस्ट्रेट समय-समय पर ऐसे अभियुक्त की ऐसी अभिरक्षा में जैसा वह उपयुक्त समझे, 15 दिन से अनाधिक समय के लिए निरोध प्राधिकृत करेगा।

(3) मजिस्ट्रेट पुलिस अभिरक्षा में निरोध को प्राधिकृत करते हुए ऐसा करने के कारणों को अभिलिखित करेगा।

धारा 169

जब पुलिस अधिकारी पाता है कि पर्याप्त साक्ष्य नहीं है या अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाने को न्यायोचित होने के लिए संदेह के समुचित आधार नहीं है तो