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वह उसे उसके द्वारा जमानतियों या बिना जमानतियों के साथ एक बंधपत्र निष्पादित करने पर संज्ञान लेने को प्राधिकृत मजिस्ट्रेट के समक्ष जब अपेक्षित हो उपस्थित होने के लिए छोड़ देगा।
धारा 170
(1) जब पुलिस अधिकारी पाता है कि पर्याप्त साक्ष्य या समुचित आधार है तो ऐसा अधिकारी अभियुक्त की अधिरक्षा में संज्ञान लेने को सक्षम है।
(2) इसके साथ वह मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली वस्तुओं को भेजेगा और परिवादी एवं साक्षियों से मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने के लिए बंधपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा करेगा।
धारा 173
पुलिस अधिकारी उन पक्षों के नामों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट भेजेगा जो सूचना देने के लिए जिम्मेदार है।
अभियुक्त रिपोर्ट की प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए हकदार है।
अभियुक्त को उपस्थित होने से छूट (उन्मुक्ति)
धारा 205, 366, 424, 6 इलाहाबाद, 59ः 21 कलकत्ता 588
धारा 205 - जब कभी मजिस्ट्रेट सम्मन निर्गत करता है तो यदि वह ऐसा करने के कारण देखता है तो वह अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति से छूट दे सकता है और उसको वकील द्वारा उपस्थित होने की अनुमति दे सकता है।
(2) परंतु मजिस्ट्रेट किसी भी समय अभियुक्त को बुलवा सकता है।
धारा 366 - निर्णय का समय
(निर्णय) अभियुक्त की उपस्थिति में सुनाना चाहिए जब तक कि वह अभियुक्त नहीं है और दंडादेश मात्र जुर्माने का है।
धारा 424 - अपील न्यायालय द्वारा निर्णय।
अभियुक्त को निर्णय सुनने के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं है।
II. न्यायालय एक विचारण में कितने अपराधों का संज्ञान कर सकता है।
आरोपों का संयोजन
धारा 233, 234, 235
धारा 233
- हर एक अपराध पर पृथक रूप से विचारण किया जाएगा।