214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अ एक अवसर पर चोरी का अभियुक्त है और एक अन्य अवसर पर गंभीर चोट पहुंचाने का अभियुक्त है। अ निश्चिततः दोनों अपराधों के लिए पृथकतः विचारित होना चाहिए। वह दोनों के लिए एक विचारण में विचारित नहीं किया जा सकता है। इस सामान्य प्रतिवेदन के अपवाद हैं।
धारा 234
एक ही प्रकार के तीन अपराध एक विचारण में लिए जा सकते हैं, यदि वे बहार महीनों की समयावधि के अंतर्गत किए जाते हैं। चाहे वे उसी व्यक्ति के विरुद्ध है या नहीं।
उसी प्रकार के अपराध - एक ही प्रकार के दंड (सजा) के समान दंड से भारतीय दंड संहिता या किसी विशेष या स्थानीय विधि की उसी धारा के अधीन उसी प्रकार दंडनीय अपराध एक ही प्रकार के अपराध हैं।
वे तीन से अधिक न हो, धारा 411 के अधीन तीन अपराध एवं धारा 414 के अधीन 3 अपराधों का संयोजन दोषपूर्ण है। जालसाजी के तीन अपराध और न्यास भंग के तीन अपराधों का संयोजन दोषपूर्ण है।
उसी प्रकार के
जारकर्म एवं द्विविवाह समान नहीं है।
हत्या एवं चोट समान नहीं है।
हैं जो एक विशेष संबंध में व्यक्तियों के बीच होती है जैसे -
(i) संरक्षक एवं प्रतिपाल्य।
(ii) अटर्नी एवं मुवक्किल।
(iii) चिकित्सक एवं रोगी।
(iv) पापमोचक एवं प्रायश्चिती।
पूर्ण प्रकटीकरण आवश्यक।
पक्षों के दायित्व
विक्रेता के दायित्व
1. हस्तांतरण से पूर्व
- धारा 55 (1) (क) - तात्विक दोषों को प्रकट करना।
(1) भूमि के विक्रय के लिए एक संविदा भरपूर विश्वास का संविदा नहीं हैः प्रकटीकरण का कर्त्तव्य पूर्ण नहीं है। प्रकट करने का कर्त्तव्य, अव्यक्त दावों को प्रकट करना एक दायित्व है।