216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(ii) अंतरण से संबंधित।
(iii) अन्य छानबीन।
(2) हक संबंधी अपेक्षाएं - ये अपेक्षाएं कि अभिलेख करार पाए गए हक को नहीं
दर्शाती हैं या यह कि अभिलेख प्रभाकर नहीं है अर्थात् विधिवत अनुप्रमाणित नहीं
है।
(3) अंतरण से संबंधित विषयों पर अपेक्षाएं ऐसे विषयों को निर्दिष्ट करती हैं जैसे
अंतरण के पक्षों का संयोजन या सहमति।
(4) छानबीन विक्रेता की संरक्षा के लिए है और विक्रेता द्वारा प्रकटीकरण से संभव
विलोपनों की ओर ध्यानाकृष्ट करना है और ऐसे विषयों जैसे सुखाधिकारों,
विभाजन दीवारों एवं बीमा के बारे में सूचना खोजना।
(5) विक्रेता सभी अपेक्षाओं, जो हक से प्रासंगिक है और जो विशिष्ट है, के
उत्तर देने के लिए बाध्य है।
(6) अपेक्षाओं का उत्तर देने का कर्त्तव्य, धारा 55(1) (क) के अधीन दोष के
प्रकटीकरण के कर्त्तव्य से सर्वथा भिन्न है क्योंकि क्रेता के द्वारा अपेक्षा करने
का विलोपन विक्रेता को निर्मुक्त नहीं करेगा यदि उसने पूर्ण प्रकटीकरण नहीं
किया है।
(7) क्रेता अपेक्षाओं का अधित्याग कर सकता है। अधित्याग अभिव्यक्त हो सकता
है या अंतर्निहित हो सकता है।
(8) अधित्याग आचरण में अंतर्निहित होता है।
(i) जब क्रेता की गई अपेक्षा पर दबाव नहीं डालता है।
(ii) जब क्रेता मूल्य चुकाने के लिए समय मांगता है।
(iii) जब क्रेता कब्जा ले लेता है।
(iv) जब क्रेता समग्र या आंशिक मूल्य अदा करता है।
4. धारा 55 (1) (घ) - हस्तांतरण का निष्पादन
- निष्पादन क्रेता या ऐसे व्यक्ति के लिए हो सकता है जैसा क्रेता निर्देश करे।
फलतः हस्तांतरण से पूर्व क्रेता द्वारा पुनर्विक्रय पर हस्तांतरण उपक्रेता के लिए
निर्देशित किया जा सकता है। विक्रेता हस्तांतरण के लिए मूल क्रेता का पक्ष
होने की अपेक्षा कर सकता है, यदि मूल्य में अंतर है, अथवा नहीं। 2. विक्रेता को उपयुक्त ड्राफट देना क्रेता का कर्त्तव्य है - 31 सी.ए.एल.एल.जे.
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