भाग -4 अपराधी का विचारण - Page 234

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  1. यह क्रेता का कर्त्तव्य प्रतिकूल संविदा के अधीन है।

  2. अंतरण का निष्पादन एवं मूल्य की अदायगी एक साथ किए जाने वाले

पारस्परिक कर्त्तव्य हैं। वे समवर्ती वायदे हैं। यदि दोनों में से कोई पक्ष

विनिर्दिष्ट पालन के लिए दावा लाता है तो उसे अवश्य दर्शाना चाहिए कि

वह अपने भाग का पालन करने को तैयार और इच्छुक था।

  1. निष्पादन के लिए समुचित समयः-

(i) समुचित समय के संबंध में धारा मौन है।

(ii) विक्रय संविदा द्वारा समय प्रायः नियत किया जाता है।

(iii) यदि समय निश्चित है और अनुचित विलंब होता है तो उपयुक्त रास्ता समय को संविदा का सार मानते हुए सूचना देनी है।

(iv) यदि समय नियत नहीं किया गया है तो उपयुक्त समय है जब विक्रेता अपना हक प्राप्त कर लेता है।

  1. निष्पादन के लिए समुचित समयः-

(i) धारा मौन है।

(ii) चूंकि वह क्रेता ही है, जिसे विक्रेता के लिए ड्राफट अंतरण करना है, निष्पादन के लिए समुचित स्थान विक्रेता का आवास था उसके सालिसिटर का कार्यालय होगा।

  1. हस्तांतरण का खर्चः-

(i) धारा मौन है।

(ii) यह प्रायः संविदा की शर्तों द्वारा नियत किया जाता है।

(iii) किसी स्पष्ट शर्त के अभाव में क्रेता को टिकट (stamp) आदि का मूल्य अदा करना पड़ता है - धारा 29 (सी) भारतीय स्टाम्प अधिनियम

  1. धारा 55 (1) (ग) - संपत्ति की देखभाल

  2. विक्रय संविदा क्रेता को संपत्ति में कोई हित प्रदान नहीं करती है। वरन्

यह विक्रेता पर संपत्ति को सावधानी से बरतने की एक व्यक्तिगत बाध्यता

आरोपित करती हैं।

  1. विक्रेता हक विलेखों के प्रति सावधानी भी अवश्य बरतें। हक विलेखों के

खोने से संपत्ति के मूल्य का ”ास होता है और संपदा को क्षति।

  1. सावधानी बरतने का अभिप्राय है वह करना जो एक विवेकशील स्वामी

को करना चाहिए और संपत्ति की उचित मरम्मत करनी चाहिए और उसे