218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
अतिचारियों से रक्षित करना चाहिए।
- सावधानी बरतने का दायित्व संविदा का आनुषंगिक है और हस्तांतरण में
विलय नहीं होता है। सावधानी बरतने का कर्त्तव्य विक्रय की सम्पन्नता के
बाद भी अविरल रहता है और क्रेता विक्रेता द्वारा कृत किसी विलोप (हानि)
के लिए उत्तरदायी नहीं है। यदि विक्रेता अपने कर्त्तव्य की अवहेलना करता
है तो क्रेता क्रय धन में से प्रतिकर घटाने के लिए हकदार है, संपन्नता के
बाद क्रेता नुकसानी वसूल कर सकता है।
- धारा 55 (1) (जी) जावकों का चुकाना
(1) यह जो आंग्ल विधि में जावक कहलाते हैं उसे अदा करना विक्रेता का कर्त्तव्य है। भारत में जो सम्मिलित हैं वे हैं -
(i) लोक प्रभार
(ii) किराया
(iii) ब्याज
(iv) विल्लंगम
I. जिस पर लोक प्रभार
(i) राजकीय राजस्व
(ii) नगर पालिका कर
(iii) कानून द्वारा या तो अभिव्यततः या विवक्षिततः भूमि पर भारित संदाय जो उस भूमि पर कर द्वारा या अन्य प्रक्रिया के वसूलनीय होने के कारण है।
II. किराया - किराए की अदायगी एक प्रश्न है जो उद्भूत होता है जब बेची गई संपत्ति पट्टठ्ठाघृत संपत्ति है। पट्टठ्ठाघृत संपत्ति का विक्रेता, विक्रय के दिनांक तक देय होने वाले किराए को अदा करने के लिए बाध्य है।
III. ब्याज
IV. विल्लंगम
(i) विल्लंगम का अभिप्राय - दावा, धारणाधिकार या संपत्ति से संबद्ध
दायित्व।
(ii) सभी विल्लंगमों से मुक्त करना विक्रेता का कर्त्तव्य है। यह निस्सार है
कि क्रेता जब उसने संविदा किया था विल्लंगमों के विषय में जानकार
था।
(iii) जब तक कि उस आशय का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, विक्रय विल्लंगमों
के अधीन नहीं है।