220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(i) कलकत्ता दृष्टिकोण। यह हक एक पूर्ण संविदा अनुध्यात करता है और अंग्रेजी हस्तांतरण में हक की प्रसंविदा के अनुरूप है।
(57 कलकत्ता 1189)
(ii) मद्रास दृष्टिकोण - यह खंड उन वादों पर विचार करती है जहां कार्य की प्रगति संविदा के चरण से आगे नहीं हुई है -
40 मद्रास 338 (350) 38 मद्रास 1171
(iii) लाहौर दृष्टिकोण - मद्रास का अनुसरण करता है -
6 लाह 308
(iv) बम्बई दृष्टिकोण - यह हस्तांतरण के वाद के दायित्व से संबंधित है -
18 बंबई एस.आर. 292ः 52 बंबई 883ः 31 बंबई एल.आर. 658
(अ) धारा 55(1) संपन्नता से पूर्व क्रेता को यह निश्चित करने के योग्य बनाती
है यदि अर्पित हक उपयुक्त संदेह से मुक्त है। एक बार उसने हस्तांतरण
को स्वीकार कर लिया और विक्रय पूर्ण है, उसको कपट के सिवाए उसे
संविदा पर कोई उपचार नहीं है।
(ब) धारा 55(2) के द्वारा विविक्षित हक की प्रसंविदा क्रेता को अंतरण के बाद
खोजे गए दोषों के वाद में एक और उपचार प्रदान की जाती है।
(v) एक अन्य दृष्टिकोण जो संभवतः सही दृष्टिकोण है।
(अ) हक के संबंध में विक्रेता का दायित्व दोहरा है।
(i) वह क्रेता को उपयुक्त संदेह से मुक्त एक सत्वाधिकार हक अवश्य अंतरित करे।
(ii) वह क्रेता को हक अवश्य हस्तांतरित करे जिसको वह हस्तांतरित करना और कुछ भी कम न हो घोषित करता है। उसको अपनी बात पूरी करनी चाहिए।
(1) के अधीन अवश्य प्रमाणित करे कि उसने अपना हक मान्य तरीकों में से एक
में प्राप्त किया हैः जैसे कि निर्धारण, कब्जा, विरासत, क्रय आदि।
(2) के अधीन यदि वह पूर्ण स्वामित्व के हित को अंतरित करना घोषित करता
है तब अंतरित हित अवश्य ही पूर्ण मालिकाना हित हो और मात्र अधिभोगी
हित न हो। जैसे भारमुक्त भूमि का विक्रय, जो भाराधीन थीः अंतरणीय भूमि
का अंतरणीय के रूप में अंतरण करना।
(ब) धारा 55(1) दायित्व उपयुक्त संदेह से मुक्त हक से संबंधित हैः धारा 55(2) हक जिसको उसने हस्तांतरित किया घोषित किया, के हस्तांतरित किए जाने के लिए दायित्व से संबंधित है।