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धारा 84
- जब पुलिस अधिकारी को निर्देशित वारंट की अधिकार-क्षेत्र के बाहर तामील
की जानी है तो वह साधारणतः इसे पृष्ठांकन हेतु मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस
अधिकारी, जो वारंट तामील करने की सीमा के भीतर स्टेशन प्रभारी के
अधिकारी के रैंक से नीचे का न हो, के पास पृष्ठांकन हेतु ले जाएगा।
- ऐसा मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस अधकिरी अपने नाम का पृष्ठांकन करेगा और
ऐसा पृष्ठांकन उस पुलिस अधिकारी के लिए पर्याप्त प्राधिकारी होगा जिसे
उसकी तामील करने का निर्देश दिया जाता है।
- यदि पृष्ठांकन प्राप्त करने में विलंब होने की संभावना है तो इसकी तामील
बिना पृष्ठांकन के भी की जा सकती है।
धारा 85
जब गिरफतारी बाहर की जाती है तो गिरफतार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस आयुक्त के पास ले जाया जाएगा।
धारा 86
तब वे उसे वारंट निर्गत करने वाले न्यायालय को अभिरक्षा में ले जाना निर्देशित करेंगे।
गिरफतारी के वारंट के अनिष्पादन का प्रभाव
धारा 87
- यदि व्यक्ति फरार है तो न्यायालय ऐसी उद्घोषणा के प्रकाशन की दिनांक
से 30 दिन से अनधिक नियत स्थान पर नियत समय पर उसके उपस्थित
होने की अपेक्षा करते हुए एक लिखित उद्घोषणा प्रकाशित कर सकता है।
- उद्घोषणा किस प्रकार प्रकाश्ति की जानी हैः
(अ) वह उस स्थान पर जहां वह साधारणतः निवास करता है, पढ़ी जाएगी।
(ब) उस घर जिसमें वह रहता है, के किसी सुप्रकट स्थान पर चस्पा की जाएगी।
(स) उसकी एक प्रति न्यायालय के भवन पर चस्पा की जाएगी।
धारा 88
- उद्घोषणा निर्गत करने वाला न्यायालय धारा 87 के अधीन घोषित व्यक्ति से
संबंधित स्थावर या जंगम या दोनों प्रकार की संपत्ति की कुर्की के आदेश
किसी भी समय कर सकता है।