न्यास क्या है एवं अधिनियम किसके लिए लागू होता है? - Page 241

224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

इसके संबंध न्यास अधिनियम द्वारा नियमित नहीं होते हैं। वे पारंपरिक या स्वीय विधि द्वारा नियमित होते हैं।

(III) युद्ध में की गई लूट का वितरण।

(1) लूट (प्राइज) - यह शब्द जलपोत के लिए या सागर में युद्ध पोत की समुद्रीय सेना द्वारा यौद्धिक नियमानुसार बलाधिकृति (लूट के) माल के लिए प्रयुक्त। या पत्तन में अभिगृहीत के लिए प्रयुक्त।

(2) युद्ध में लिया गया समग्र माल सामान्यतः न्यास के न्यासियों के अनुदत्त राजकीय (शाही) प्राधिकार से विजेताओं के बीच वितरित किए जाने के लिए संप्रभु राजा में निर्विष्ट होता है।

(3) लूटों को वितरित करने के उद्देश्य के लिए गठित इस प्रकार के न्यास पर न्यास अधिनियम लागू नहीं होता है।

(IV) लोक न्यास एवं प्राइवेट पूर्त विन्यास।

न्यास या तो लोक होते हैं या प्राइवेट।

(i) लोक न्यास - न्यास, लोक न्यास है, जब वह या तो आम जनता या उसके एक बड़े भाग के फायदे के लिए एक खास रूप में गठित है। लोक न्यास लोगों के एक असुनिश्चित निकाय के लिए होता है यद्यपि अभिनिश्चय के योग्य होता है।

(ii) प्राइवेट न्यास - प्राइवेट न्यास केवल निश्चित व्यक्तियों के लिए गठित न्यास है जो एक सीमित समय में ही अभिनिश्चय किए या अभिनिश्चित होने ही चाहिए।

(iii) लोक न्यास के प्रयोजन - उनके तीन शीर्षक हैंः-

(1) लोक प्रयोजन

(2) पूर्त प्रयोजन

(3) धार्मिक प्रयोजन

  1. लोक प्रयोजन पद दो उपार्थों में प्रयुक्त किया जाता हैः-

(अ) उसके साधारण अर्थ में - इसमें प्रयोजन शामिल हैं जैसे सड़कों की चिपचाप या मरम्मत, एक पल्ली या पल्ली वासियों के लिए पानी की आपूर्ति करना। किसी धारा या पुलिया जो पल्लों में अपेक्षित है के ऊपर पुलों का बनवाना या मरम्मत करना।

  1. पूर्त प्रयोजन पद में शामिल है, दान देना, दान गृहों के भवन बनवाना, अस्पताल आदि की स्थापना।

  2. धार्मिक पद - धार्मिक ग्रंथ या पूजा से संबंधित चीजें शामिल हैं - प्रयोजन