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धार्मिक ग्रंथों का क्रय या वितरण। गिरजाघरों, मंदिरों आदि का रख रखाव।
यदि न्यास लोक न्यास है - न्यास अधिनियम लागू नहीं होता है।
यदि प्राइवेट न्यास ऐसा न्यास है जो केवल एक धार्मिक या पूर्त न्यास नहीं है तभी अधिनियम लागू होता है।
लोक न्यास या प्राइवेट न्यास, जो पूर्त या धार्मिक है, पर कौन सी विधि लागू होती है? विभिन्न प्रकार के अधिनियम लागू होते हैं।
(1) धारा 92 सिविल प्रक्रिया संहिता।
(2) धार्मिक पूर्त अधिनियम 1863 (द रिलीजस एंडानमेंट एक्ट 1863)
(3) धार्मिक सोसायटी अधिनियम - 1880 का अधिनियम। (द रिलीजस सोसायटी
एक्ट ऑफ 1880)
(4) शासकीय न्यासी अधिनियम - 1913 का अधिनियम 11
(5) पूर्त न्यास अधिनियम 1890 का 6 (द चेरिटेबल ऐनडावमेंट्स एक्ट)
(6) पूर्त एवं धार्मिक न्यास अधिनियम 1920 का 14 (द चेरिटेबल एंड रिलीजस
ट्रस्ट एक्ट)
विभिन्न प्रकार के न्यास
न्यास विभिन्न वर्गों में आते हैं। कोई न्यास किस वर्ग में आता है यह उस पर निर्भर करता है कि वह किस दृष्टिकोण से देखा गया है।
न्यास तीन दृष्टिकोणों से देखा जाता हैः-
(i) उस ढंग के दृष्टिकोण से जिसमें न्यास सृजित किया जाता है।
(ii) न्यास की रचना के दृष्टिकोण से।
(iii) न्यासी पर डाले गए कर्त्तव्य की प्रकृति के दृष्टिकोण से।
- इस ढंग के दृष्टिकोण से जिसमें न्यास संघटित सृजित किया जाता है। ये दो
खंडों में होते हैं (1) अभिव्यक्ति एवं (2) आन्वयिक न्यास।
न्यास की रचना के दृष्टिकोण से वे दो खंडों में होते हैं (1) पूर्ण संरचित न्यास एवं (2) अपूर्ण रचित न्यास।
न्यासियों पर डाले गए कर्त्तव्यों की प्रकृति के दृष्टिकोण से न्यास दो खंडों (1) सादा न्यास एवं (2) विशेष न्यास में होते हैं।
प्रथम अभिव्यक्त एवं आन्वयिक न्यास।
न्यास दो तरह से उद्भूत हो सकता है।
(i) यह किसी व्यक्ति द्वारा की गई स्वैच्छिक घोषणा का परिणाम है।