226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(ii) यह विधि शासन का परिणाम हो सकता है।
- जब न्यास स्वैच्छिक घोषणा का परिणाम होता है तो वह अभिव्यक्त न्यास
या घोषित न्यास है। जब न्यास विधि शासन का परिणाम होता है तो वह
आन्वयिक न्यास कहलाता है।
- आन्वयिक न्यास पद एक दूसरे अर्थ में प्रयुक्त किया जाता है। इस अर्थ में
यह ऐसे न्यास को सूचित करने के अभिप्राय से प्रयुक्त किया जाता है जो
विलेख के अर्थ का परिणाम है। न्यास अभी आशय का विषय है। आशय
विशिष्ट शब्दों में घोषित हो सकता है या वह न्यायालय द्वारा विलेख के
उपयुक्त अर्थान्वयन पर पक्ष द्वारा इंगित पाया जा सकता है। परवर्ती दशा में
न्यास कभी-कभी आन्वयिक न्यास कहलाता है।
- इस अर्थ में प्रयुक्त आन्वयिक न्यास के संबंध में दो बातें याद रखनी हैंः
(I) इस प्रकार का आन्वयिक न्यास कभी-कभी अभिव्यक्त न्यास के प्रतिकूल हो जाता है। यह बिल्कुल गलत है। इस प्रकार का न्यास वस्तुतः एक अभिव्यक्त न्यास ही है और इसके प्रतिकूल नहीं है। फिर भी न्यास एक अभिव्यक्त न्यास है, क्योंकि व्यवस्थापक की भाषा अस्पष्ट या भद्दी है, यदि उसकी रचना के समय की भाषा से न्यायालय इस निष्कर्ष को निकाले कि न्यास आशयित किया गया होगा।
(II) जो न्यास इस अर्थ में आन्वयिक है कि विलेख का अर्थ करते समय आशय निकाला गया था तो उसकी अति आन्वयिक न्यास से नहीं की जानी चाहिए जो विधिक प्रवर्तन का परिणाम है। पूर्ववर्ती में एक न्यास रचना का आशय है और इस अर्थ में वह पक्षों के स्वैच्छिक कार्य का परिणाम है। पूर्ववर्ती में न्यास गठित करने का कोई आशय नहीं है। वह विधि की देन है। पक्षकार के कार्य का नहीं।
आन्वयिक न्यास के दो खंड हैंः-
(1) परिणामिक न्यास।
(2) अपरिणामिक न्यास।
दोनों के बीच अंतर को बाद में विचारित किया जाएगा जब आन्वियिक न्यास पर विचार किया जाएगा। उनमें एक बात सामान्य है - वह दोनों ही पक्ष के कार्य के परिणाम नहीं वरन् विधिक प्रवर्तन के परिणाम है।
(II) पूर्णतः गठित न्यास और अधूरा गठित न्यास।
(I) न्यास पूर्णतः गठित कहा जाता है जब न्यास संपत्ति न्यासियों में हिताधिकारियों के लाभ के लिए निविष्ट कर दी जाती है। जब न्यास की घोषणा मात्र है और संपत्ति न्यासी में निविष्ट नहीं की गई है तो न्यास अधूरा गठित है।
(2) यह प्रश्न कि क्या न्यास पूर्णतः गठित है या नहीं, सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है जहां