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जहां साधारण न्यास विद्यमान रहता है वहां लाभग्राही को बशर्ते कि वह विधितः पूर्णतः हकदार है, संपत्ति पर वास्तविक कब्जा रखने का अधिकार और लाभग्राही की हिदायत के अनुसार विधिक संपदा का व्ययन करने के लिए न्यासियों को बाध्य करने का भी अधिकार रखता है।
विशेष न्यास - (1) अनुसचिवीय एवं वैवेकिक में विभाजित किए जाते हैं।
दोनों में न्यासियों के करने के लिए सकारात्मक कर्त्तव्य होते हैं।
अंतर का बिंदु है कि अनुसचिवीय न्यास में कर्त्तव्य ऐसे होते हैं कि न्यासी को अपना विवेक प्रयुक्त करने के लिए स्मरण नहीं करना पड़ता है जबकि वैवेकिक न्यास में न्यासी से प्रजा का प्रयोग करने की अपेक्षा की जाती है।
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