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अध्याय - दो
अभिव्यक्त न्यास का सृजन
(i) विधिमान्य न्यास के सृजन के लिए शर्तें-
एक घोषित न्यास की विधिमान्यता के लिए विधि द्वारा विहित निम्न चार शर्तें अवश्य पूरी होनी चाहिएः-
धारा - 6
न्यास के आवश्यक पक्ष हों।
(2) व्यवस्थापक की भाषा ऐसी हो कि उसमें न्यायालय तथ्य के रूप में उससे निष्कर्ष निकाल सके।
(अ) न्यास के सृजन करने का आशय_
(ब) अभिनिश्चय संपत्ति का_
(स) अभिनिश्चय लाभग्राहियों के पक्ष में_ और
(द) एक अभिनिश्चय प्रयोजन के लिए।
(ii) धारा - 7-8
न्यास संपत्ति ऐसी प्रकृति की हो कि वह न्यास में व्यवस्थित और अंतरित करने के योग्य हो।
(iii) धारा - 4
न्यास का उद्देश्य विधिपूर्ण हो।
अंग्रेजी न्यास विधि, न्यास के सृजन के संबंध में भारतीय न्यास विधि से भिन्न है स्नैल के अनुसार न्यास के सृजन के लिए तीन निशि्ंचतताओं की अपेक्षा की जाती है।
(1) आशय की निशि्ंचतता।
(2) न्यास संपत्ति की निशि्ंचतता।
(3) लाभग्राही की निश्ंचतता। अंडरहिल के अनुसार न्यास के सृजन के लिए चार निशि्ंचतताओं की अपेक्षा की जाती है, जो स्नैल द्वारा वर्णित है और एक औरः
( iv ) न्यास का प्रयोजन।
अंग्रेजी विधि में न्यास संपत्ति न्यासी को हस्तांतरण की अपेक्षा नहीं की जाती है। किंतु भारतीय विधि में की जाती है।
(II) आशा की निशि्ंचतता
(1) न्यास को सृजित करने का आशय शब्दों या कार्यों के द्वारा हो सकता है।