234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(II) ये दृष्टांत हैं जो दर्शाते हैं कि न्यास रचयिता के कार्यों द्वारा न्यास सृजित किया जा सकता है।
दृष्टांतः- अ पिता अपनी पुस्तक में अपने पुत्र के नाम खाता खोलकर उसमें अपने पुत्र के नाम धन जमा करता है।
बंबई 125
(II) अ उसमें अंश खरीदता है।
15 बंबई 268ः 17 कलकत्ता 620 (628)
- शब्दों के द्वारा सृजित न्यास के उदाहरण अनावश्यक हैं। प्रश्न है कि यह दर्शाने के लिए किस प्रकार की भाषा आवश्यक है कि दर्शाने की एक निशि्ंचतता है कि एक न्यास के सृजन का आशय था।
(1) न्यास के सृजन के लिए कोई तकनीकी पदों की अपेक्षा नहीं की जाती है। बात अर्थ करने की है। अतः प्रश्न यह निश्चित करना है कि क्या संपूर्ण विल या विलेख का अर्थ करने पर वसीयतकर्ता का आशय था कि वह व्यक्ति जिसको संपत्ति दी गई थी उसे मात्र एक न्यासी के रूप में लेगा या लाभतः लेगा जो कामना या बांछन के जोड़े गए पद के अधीन हो जो वसीयतकर्ता के सोच विचार में आदाता को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त होगी। किंतु जो विषय में आशयित नहीं थी और उस पर कोई बाध्यता नहीं डालती। प्रश्न है कि क्या न्यास रचयिता ने मात्र इच्छा व्यक्त की थी कि न्यासी को कार्य विशेष करना चाहिए या क्या उसने उस पर एक निश्चित कार्य करने की बाध्यता डाली है। यदि वस्तुतः बाध्यता आशयित थी तो स्पष्टतः उसका आशय न्यास सृजन का था।
(2) प्रयुक्त भाषा या तो याचनात्मक हो सकती है या आज्ञात्मक हो सकती हैः-
(i) शब्द अनुरोध, अनुशंसा, कामना, आशा आदि याचनात्मक शब्द हैं।
(ii) ऐसे शब्द न्यास सृजन के आशय को इंगित करने वाले नहीं कहे जा सकते क्योंकि वे न्यासी पर एक दायित्व को आरोपित किए जाने का आशय नहीं दर्शाते हैं।
(iii) अंग्रेजी विधि में ऐसे याचनात्मक शब्दों को न्यास गठित करने वाले शब्द माना गया था और न्यास, याच्य न्यास कहा जाता था किंतु आधुनिक प्रवृत्ति के विपरीत है।
(III) लाभग्राही के प्रति निशि्ंचतता
लाभग्राही, इस प्रकार विनिर्दिष्ट या वर्णित किया जाए कि वह पहचाना जा सके।
अनिशि्ंचतता के दृष्टांत -
(i) अ को संपदा इस निदेश के साथ दी गई कि वह उसे परिवार में रखेगा - परिवार अनिश्चित।