अभिव्यक्त न्यास का सृजन - Page 252

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(ii) व्यवस्थापक के संबंधियों को - संबंधी अनिश्चित।

  1. पर्याप्त वर्णन के दृष्टांत

(1) वंशज - पर्याप्त वर्णन होना ठहराया गया - अतः अनिश्चित नहीं।

3. प्रयोजन की निश्चितता

  1. सपंत्ति कैसे प्रयुक्त होनी है, निश्चित उल्लेखित होना चाहिए।

  2. प्रयोजन की अनिश्चितता के दृष्टांतः-

(1) कतिपय व्यक्तियों पर विचार करना।

(2) उनके प्रति कृपालु होना।

(3) उनके लिए प्रचुर प्रावधान करना।

(4) उनको याद करना।

(5) उनके साथ न्याय करना।

(6) उनके भतीजे की देखरेख करना जो भविष्य में सर्वोत्तम प्रतीत हो सके।

(7) अपने लिए अपने बच्चों के लिए और ईश्वर की चर्चा एवं गरीबों को याद करने के लिए संपत्ति प्रयोग करना।

  1. न्यास के प्रयोजन का अर्थ है वह ढंग जिससे लाभग्राही लाभान्वित होंगे, वह जिस से संपत्ति प्रयुक्त होनी है।

4. न्यास संपत्ति संबंधी निश्चतता

  1. संपत्ति जो न्यास की विषय वस्तु होनी है वह उचित निश्चितता के साथ इंगित हो। यह पहचान के योग्य अवश्य विनिर्दिष्ट या पर्याप्त वर्णित की गई हो।

दृष्टांतः- (i) अ किसी संपत्ति की वसीयत ब के लिए करता है और निदेश है कि उसका अधिकांश स के बच्चों में वितरित किया जाए। यह न्यास का सृजन नहीं है क्योंकि संपत्ति एक उचित निश्चितता के साथ इंगित नहीं की गई है।

(ii) अ अपनी संपत्ति अपनी पत्नी के लिए न्यास में देता है और निदेश करता है कि उसका ऐसा भाग जो कि उसके द्वारा अपेक्षित नहीं हो उसकी मृत्यु के बाद उसके बच्चों के लिए न्यास में रखा जाएगा।

(iii) अ संपत्ति अपने नौकरों के लिए इस निदेश के साथ न्यास में देता है कि मेरी संपदा के ऐसे भागों में से जो कि उसके द्वारा बेचे या निपटाए नहीं जाएं, उनके अपसरण के अनुसार उन्हें पुरस्कृत किया जाए।

निष्कर्षः-

(1) इस प्रकार यह अवश्य स्पष्ट होना चाहिए कि व्यवस्थापक का आशय निश्चित