अभिव्यक्त न्यास का सृजन - Page 253

236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

संपत्ति पर निश्चित न्यास निश्चित व्यक्तियों के लिए सृजित करने की अभिच्छा

थी। कोई भी न्यास निश्चित लाभग्राहियों को निश्चित अधिकारों को देने के लिए

निश्चित दायित्व सृजिश करने के आशय के अभाव में उद्भूत नहीं हो सकता

है।

(2) इस पर भी यह ध्यान देने योग्य होगा कि एक निश्चित व्यक्ति को न्यासी के रूप

में मनोनीत करने की विफलता न्यास को अवैध नहीं होने देती है। जहां एक न्यास

स्पष्टतः आशयित है तो (स्वैच्छिक न्यास के नियमाधीन) न्यासी नियुक्त करने

की मात्र अवहेलना न्यास को अवैध नहीं होने देगीः क्योंकि साम्या न्यासी की

कमी के लिए न्यास का विफल होना कभी अनुमत नहीं करेगी। अतएव यदि कोई

न्यासी नियुक्त नहीं किया जाता है या नियुक्त न्यासी, या तो मृत्यु के या परित्याग,

या अक्षमता या अन्य कारण से विफल हो जाता है तो न्यास विफल नहीं होता है,

वरन् किसी भी व्यक्ति (बिना सूचना के मूल्य पर क्रेता से अन्य) जिसके हाथों में

संपत्ति आती है अंतःकरण पर दृढ़ हो जाता है और ऐसा व्यक्ति उसे निष्क्रिय न्यासी

के रूप में रखता है जिसका कर्त्तव्य केवल यह है कि वह उसे नए न्यासियों को,

जैसे ही एवं जब उचित रूप से नियुक्त हो जाएं हस्तांतरित करे।

(3) संपत्ति, लाभग्राही या न्यास के प्रयोजन की अनिश्चितता का प्रभाव भिन्न-भिन्न हैः-

(i) जहां न्यास संपत्ति संबंधी अनिश्चितता से प्रभावित है वहां न्यास शून्य है। चूंकि पहचान योग्य कोई संपत्ति नहीं है इसलिए वाद करने के लिए कुछ भी नहीं है।

(ii) जहां न्यास लाभग्राही या प्रयोजन संबधीं अनिश्चितता से प्रभावित है वहां न्यास शून्य है। चूंकि कोई व्यक्ति लाभग्राही के रूप में नामित नहीं किया जाता है इसलिए कोई भी व्यक्ति उसे प्रवर्तित कराने के लिए आगे नहीं आ सकता।

(iii) जहां संपत्ति पर्याप्त निश्चितता के साथ वर्णित है, और वस्तुतः प्रयुक्त शब्द या विद्यमान परिस्थितियां स्पष्ट करती हैं कि यद्यपि दाता ने पर्याप्ततः विनिर्दिष्ट नहीं किया है उसके दान का उद्देश्य या वह तरीका जिसमें संपत्ति संबंधी कार्यवाही की जानी थी तो भी उसका तात्पर्य न्यासी द्वारा समग्र लाभप्रद हित लेने का नहीं था, विधि द्वारा दाता या उसके प्रतिनिधि के पक्ष में फलित न्यास विवक्षित करती है।

(II) न्यास संपत्ति अंतरण के योग्य हो।

  1. कौन-सी संपत्ति अंतरण के योग्य है?

  2. इस प्रश्न का उत्तर संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 6 में मिलता है।

  3. वह संपत्ति जो अंतरित होनी है, न्यास की विषय-वस्तु हो सकती है।