238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(2) न्यास, तस्करी का कार्य करने वाला हो और उसके लाभों से उसे बनाए रखने
वाला है।
(3) न्यास जो दिवालिया परिस्थितियों में व्यक्ति द्वारा लेनदारों को विफल करने
के लिए है।
(4) न्यास जो जारज बच्चों के लिए है।
(5) न्यास जो शाश्वतता के सृजन के लिए है।
(6) न्यास जो पति पत्नी के भविष्य में पृथकत्व को प्रभावित करने के लिए
है।
- क्या न्यास विधिपूर्ण या अविधिपूर्ण है स्थावर संपत्ति की दशा में उस विधि द्वारा
निश्चित किया जाता है जहां संपत्ति अवस्थित है।
वह न्यास जो अविधिपूर्ण है, शून्य है।
जहां किसी न्यास के दो प्रयोजन होते हैं, जिनमें से एक विधिपूर्ण है और दूसरा
अविधिपूर्ण। वहां न्यास की विधिमान्यता दोनों की पृथकरणीयता पर निर्भर करती
है। यदि वे पृथक किए जा सकते हैं तो विधिपूर्ण प्रयोजन से एक विधिपूर्ण है
और एक अविधिपूर्ण। प्रयोजन से शून्य होगा। यदि वे पृथक नहीं किए जा सकते
तो संपूर्ण शून्य होगा।
- अविधिपूर्ण न्यास के सृजन के व्यवस्थापक के परिणाम -
(i) न्यायालय उसे उसके द्वारा लाभान्वित होने के लिए आशयित व्यक्ति के पक्ष
में प्रवर्तित नहीं करेगा।
(ii) न्यायालय संपदा का वसूली करने में व्यवस्थापक की सहायता नहीं करेगा।
विधिमान्य न्यास की औपचारिकताएं
धारा 5
- न्यास, स्थावर संपत्ति का न्यास हो सकता है या चल संपत्ति का न्यास हो सकता
है। न्यास की विधिमान्यता के लिए विधि द्वारा निर्धारित औपचारिकताएं, संपत्ति
स्थावर है या जंगम, उसके अनुसार भिन्न-भिन्न होती है।
- स्थावर संपत्ति की दशा में औपचारिकताएं
इस प्रकार का न्यास दो युक्तियों से बनाया जा सकता है -
(i) या तो न्यास रचयिता के द्वारा या न्यासी द्वारा हस्ताक्षरित एक निरवसीयती
विलेख के द्वारा या_
(ii) न्यास रचयिता की विल द्वारा।