239
- जंगम संपत्ति की दशा में न्यास की औपचारिकताएं तीन युक्तियों द्वारा यह किया
जा सकता है -
(i) एक निरवसीयती विलेख के द्वारा न्यास रचयिता या न्यासी द्वारा हस्ताक्षरित।
(ii) न्यास रचयिता या न्यासी द्वारा हस्ताक्षरित वसीयती लिखत के द्वारा।
(iii) न्यासी को संपत्ति स्वामित्व के अंतरण के द्वारा।
- न्याय की घोषणा और सृजन के बीच अंतर (पांडुलिपि में व्याख्या नहीं दी गई है
- संपादक)।
5. न्याय संपत्ति का अंतरण
- जब तक न्यास रचयिता ने न्यास संपत्ति पर से अधिकार नहीं छोड़ा है, कोई
न्यास सृजित नहीं किया जाता है। इसका अर्थ है कि उसने संपत्ति का अंतरण
न्यासी को निश्चित कर दिया है।
- जहां न्यासी रचयिता स्वयं न्यासी है वहां यह लागू नहीं होता है। केवल यह
दर्शाना आवश्यक है कि उसने वह स्वरूप बदल दिया है जिसमें उसे धारण
करता है।
- जब न्यास वसीयत (विल) द्वारा सृजित किया जाता है तब यह लागू नहीं होता
है। विल उसकी मृत्यु के बाद लागू होती है और तब न्यासी कब्जा लेते हैं।
खंड II - एक न्यास विधिमान्य हो सकता है फिर भी महाभियोज्य हो सकता है
- एक विधिमान्य न्यस निम्न आधारों पर निम्न व्यक्तियों द्वारा महाभियोजित किया
जा सकता है।
(अ) व्यवस्थापक या उसके उत्तराधिकारी द्वारा इस आधार पर
(i) पक्षों की अक्षमता।
(ii) उसके सृजन पर व्यवस्थापक द्वारा की गई भूल या उसके साथ किया गया
कपट।
(ब) व्यवस्थापक के साहूकारों द्वारा उनको विफल या विलंबित करने के कपटपूर्ण आशय
से या इसलिए कि वह दिवाला अधिनियम के प्रावधानों का अतिक्रमण करता है।
(स) सूचना के बिना व्यवस्थापक से न्यास की संपत्ति के भावी क्रेता के द्वारा जहां
न्यास संपत्ति भूमि है और यह कि व्यवस्थापक द्वारा भावी क्रेता के दावे को