अभिव्यक्त न्यास का सृजन - Page 257

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

विफल करने का आशयित था।

1. न्यास के पक्षों की अक्षमता

न्यास रचयिता की क्षमता

ऐसा व्यक्ति जो संविदा करने के लिए सक्षम हो अर्थात्

(i) वह वयस्क हो, और

(ii) वह स्वस्थ चित्त हो।

  1. यद्यपि वह अवयस्क को न्यास सृजन से निवारित करना है फिर भी विधि अवयस्क के लिए न्यास बनाने को प्रावधानित करती है, यदि विधि के अधीन निर्धारित प्रति शर्तों का पालन किया जाता है तो न्यास बनाया जा सकता है, परंतु यह आरंभिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय की अनुमति से किया जाता है।

आरंभिक अधिकारिता का प्रमुख न्यायालय, सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार जिला न्यायालय है।

  1. न्यास रचयिता की न्यास सृजन की यह सामर्थ्य दो तरह से सीमित हैः-

(i) संपत्ति जो न्यास की विषय-वस्तु है अंतरणीय अवश्य हो।

(ii) वह उसे मात्र उस समय पर प्रवर्तित विधि द्वारा अनुमत सीमा तक अंतरित कर सकता है। वह न्यास वैध नहीं है यदि रचयिता को संपत्ति के व्यय की शक्ति नहीं है।

  1. कौन-सी संपत्ति अंतरणीय है और कौन-सी संपत्ति अंतरणीय नहीं है, यह संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 6 में परिभाषित है।

  2. संपत्ति के व्ययन का प्राधिकार और उस शक्ति का विस्तार विधि पर निर्भर करता है।

दृष्टांतः-

(i) एक हिंदू पिता पैतृक संपत्ति का व्ययन नहीं कर सकता है। अतः वह उसका न्यास सृजित नहीं कर सकता है।

(ii) एक हिंदू विधवा अपने पति से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति का व्ययन नहीं कर सकती है। वह उसमें केवल आजीवन संपदा रखने वाली है - अतः वह उसका न्यास की युक्ति से व्ययन नहीं कर सकती है।

(iii) एक मुसलमान ऋणों की अदायगी एवं दफनयावी व्यय के बाद अपनी संपत्ति के 1/3 से अधिक का व्ययन नहीं कर सकता - अतः वह न्यासोक्ति से 1/3 से अधिक का व्ययन नहीं कर सकता।

एक न्यासी होने की सामर्थ्य

धारा 10