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- संपत्ति धारण करने योग्य प्रत्येक व्यक्ति न्यासी होने के लिए सक्षम है।
- संपत्ति धारण करने के योग्य कौन है?
प्रत्येक जीवित व्यक्ति संपत्ति लेने एवं धारण करने के योग्य है। अतः प्रत्येक जीवित
व्यक्ति चाहे अवयस्क या विक्षिप्त (पागल) हो न्यासी होने के लिए सक्षम है। 3. संविदा करने की क्षमता और संपत्ति लेने एवं धारण करने की क्षमता में अंतर
है। प्रत्येक जीवित व्यक्ति में संविदा करने की क्षमता नहीं होती है, वरन् प्रत्येक
जीवित व्यक्ति को संपत्ति लेने एवं धारण की क्षमता होती है।
- यह अंतर करना आवश्यक है एवं दिमाग में रखना महत्त्वपूर्ण है क्योंकि एक व्यक्ति
की संविदा करने की क्षमता नहीं हो सकती है तो भी वह न्यासी होने के लिए
सक्षम है, बशर्ते उसकी संपत्ति धारण करने एवं लेने की क्षमता है, भौतिकतः मृत
न हो इसके लिए वह सिसिल दृष्टि से मृत नहीं हो।
(1) काले पानी के लिए दंड देशित व्यक्ति, सिविल दृष्टि से मृतक नहीं है। 5. एक और भी अंतर है जो ध्यान में रखना है। साधारणतः जो व्यक्ति न्यासी होने
के लिए सक्षम है वह न्यास के निष्पादन के लिए भी सक्षम है। किंतु यदि न्यास
में विवेक का प्रयोग करना हो तो वह व्यक्ति जो न्यासी होने के लिए सक्षम हैं,
आवश्यक नहीं है कि न्यास का निष्पादन करने के लिए सक्षम हो। 6. जहां न्यास ऐसा है कि उसमें विवेक का प्रयोग नहीं करना है वहां न्यास को
निपन्न करने की क्षमता की अपेक्षा वही है जो न्यासी होने के लिए है, अर्थात्
संपत्ति धारण करने एवं लेने की क्षमता।
- जहां न्यास होता है कि उसके निष्पदन में विवेक का प्रयोग अंतर्ग्रस्त है वहां न्यासी
में संविदा करने की क्षमता होनी ही चाहिए।
लाभग्राही होने की सामर्थ्य
धारा 9
प्रत्येक व्यक्ति जो संपत्ति धारण के योग्य है लाभग्राही हो सकता है।
लाभग्राही होने के लिए अपेक्षा वही है जो एक न्यासी होने के लिए है।
अर्थात् प्रत्येक जीवित व्यक्ति लाभग्राही हो सकता है। अर्थात् प्रत्येक जीवित व्यक्ति के हित में न्यास सृजित किया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि लाभग्राही की संविधिक क्षमता हो। इस संबंध में उसकी स्थिति उन्हीं प्रावधानों से विनियमित होती है जो न्यासी के लिए है।