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धारा 92
जब कोई व्यक्ति जो किसी बंधपत्र से आबद्ध है उपस्थित नहीं होता है तो पीठासीन अधिकारी, यह निर्देशित करते हुए कि ऐसा व्यक्ति गिरफतार किया जाए और उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाए, वारंट निर्गत कर सकता है। इसके अतिरिक्त परिवादी, अभियुक्त एवं साक्षियों को, न्यायालय के समक्ष तात्विक तथ्य जो अपराध की विषय वस्तु है या वस्तुएं हैं, जो अपराध को सिद्ध करने के लिए आवश्यक है, लाने की आवश्यकता है।
कूटरचित दस्तावेज, व्यक्ति परिरुद्ध
अतः हमें इनके प्रस्तुत करने के संबंध में नियमों पर विचार करना चाहिए।
किसी दस्तावेज या वस्तु का प्रस्तुतीकरण।
धारा 94
(1) जब कोई न्यायालय समझता है कि किसी दस्तावेज या वस्तु का प्रस्तुतीकरण ऐसे
न्यायालय के समक्ष अन्वेषण, जांच या विचारण या अन्य कार्यवाहियों के प्रयोजन
के लिए आवश्यक या यथेष्ट है तो वह उस व्यक्ति के लिए जिसके कब्ज़े या
अधिकार में ऐसा दस्तावेज या वस्तु होने का विश्वास किया जाता है, सम्मन में
व्यक्त समय या स्थान पर उसे प्रस्तुत करने एवं उपस्थित होने की अपेक्षा करते
हुए सम्मन जारी कर सकता है।
(2) जब सम्मन मात्र प्रस्तुत करने के लिए है तो उसे उपस्थित होने की आवश्यकता
नहीं। उसे भेज देना ही पर्याप्त है।
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(पूर्व का भाग नहीं मिला है - संपादक)
अधिकारी या न्यायाधीश या उनकी उपस्थिति एवं सुनवाई में उसके वैयक्तिक निर्देशन में और अधीक्षण में और मजिस्ट्रेट या सत्री न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षरित होगा।
उन मामलों में, जिनमें मजिस्ट्रेट या सत्री न्यायाधीश द्वारा साक्ष्य लेखबद्ध नहीं किया जाता है जैसे-जैसे हर एक साक्षी का परीक्षण आगे बढ़ता है, तो जैसा साक्षी कथन करता था कि सारांश का ज्ञापन तैयार करेगा और ऐसा ज्ञापन मजिस्ट्रेट या सत्री न्यायाधीश द्वारा अपने हाथ से लिखा और हस्ताक्षरित किया जाएगा और वह अभिलेख का अंग होगा।
धारा 363
सत्रीय न्यायाधीश एवं मजिस्ट्रेट परीक्षा के दौरान साक्षी के आचरण के संबंध में टिप्पणी भी अभिलिखित करेगा।